दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को उजागर करने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत की सराहना की है। राहुल गांधी ने कहा कि सार्थक और उनकी साथी निसर्गा ने वह काम कर दिखाया, जिसे बड़े मीडिया संस्थान और जांच एजेंसियां भी सामने नहीं ला सकीं।
सोशल मीडिया पर की प्रशंसा
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि, कम उम्र में सार्थक ने साहस, जिज्ञासा और जिम्मेदारी का परिचय दिया है। उन्होंने दावा किया कि सार्थक और निसर्गा ने CBSE तथा सेवा प्रदाता कंपनी COEMPT के बीच कथित मिलीभगत से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक किया। उन्होंने लिखा कि, जिन सवालों को बड़े मीडिया संस्थान और खोजी एजेंसियां सामने नहीं ला सकीं, उन्हें इन छात्रों ने उजागर कर दिया।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि, सरकार युवाओं को सवाल पूछने से रोकना चाहती है। उन्होंने कहा कि सार्थक जैसे छात्रों ने न केवल सवाल उठाए, बल्कि उनके जवाब भी खोजे। अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा कि जागरूक, जिज्ञासु और जानकारी रखने वाले युवा ही देश की असली ताकत हैं और लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।
संसदीय समिति के सामने रखे तथ्य
CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच सार्थक सिद्धांत ने शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों से संबंधित संसदीय स्थायी समिति के समक्ष अपनी प्रस्तुति दी। बैठक में छात्रों की शिकायतों और OSM प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
इस दौरान सीबीएसई अधिकारियों ने भी छात्रों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दिया। बोर्ड ने कहा कि पुनर्मूल्यांकन पोर्टल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को दूर कर दिया गया है और छात्रों को आवेदन के लिए पर्याप्त समय दिया गया है।
केंद्र ने बनाई जांच समिति
मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया है। क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति को OSM प्रणाली से जुड़े खरीद और प्रक्रिया संबंधी मामलों की जांच कर एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है।
CBSE के शीर्ष अधिकारियों का तबादला
विवाद के बाद CBSE अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया। वहीं, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) सहित कई एजेंसियां पुनर्मूल्यांकन पोर्टल की निगरानी कर रही हैं, ताकि किसी भी तकनीकी गड़बड़ी या साइबर हमले की आशंका से बचा जा सके।
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