दिल्ली। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि, इसका असर आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
रविवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3.9 प्रतिशत गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी क्रूड ऑयल (WTI) लगभग 4.8 प्रतिशत टूटकर 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कम होने और क्षेत्रीय तनाव में नरमी की उम्मीद से कीमतों में यह गिरावट देखने को मिली।
ट्रंप ने की समझौते की घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी शुल्क के फिर से खोल दिया जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी भी तत्काल प्रभाव से हटा दी जाएगी। ट्रंप के अनुसार, इस फैसले से दुनिया भर के जहाज सामान्य रूप से तेल परिवहन कर सकेंगे, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बना दबाव कम होगा।
दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद इस मार्ग पर तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।
विशेषज्ञों का मानना था कि, यदि संकट लंबा खिंचता, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती थीं। ऐसे में शांति समझौते की खबर ने बाजार को बड़ी राहत दी है।
19 जून को होंगे औपचारिक हस्ताक्षर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान समेत कई देशों की मध्यस्थता के बाद अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का रास्ता साफ हुआ। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी है।
बताया जा रहा है कि, इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। दोनों पक्षों ने क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को रोकने और तनाव कम करने पर सहमति जताई है।
भारत को मिल सकती है राहत
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट का लाभ भारतीय उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है। हालांकि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में किसी भी बदलाव का फैसला तेल कंपनियों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।
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