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23 लाख की ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी का खुलासा, अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के दो आरोपी बैंगलूरू से गिरफ्तार

 Newsbaji  |  Apr 02, 2026 08:48 AM  | 
Last Updated : Apr 02, 2026 08:48 AM
रायगढ़ में 23 लाख की डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार
रायगढ़ में 23 लाख की डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए अंतरराष्ट्रीय गिरोह के 2 आरोपियों को बैंगलूरू से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुसौर थाना क्षेत्र में एक रिटायर्ड शिक्षक से 23 लाख 28 हजार रुपए की ठगी के मामले में की गई। पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों में जमा 17 लाख रुपए से अधिक की राशि होल्ड कर दी है और घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।

CBI अधिकारी बनकर दी धमकी, ‘गिरफ्तारी’ का डर दिखाकर ठगे पैसे
पीड़ित गरुण सिंह पटेल, निवासी ग्राम जतरी, ने पुलिस को बताया कि, 10 अक्टूबर 2025 को उन्हें 3 अलग-अलग नंबरों से कॉल आए। कॉल करने वालों ने खुद को CBI अफसर बताते हुए कहा कि, उनके नाम से मुंबई में फर्जी खाता खुला है और जांच चल रही है। आरोपियों ने उन्हें डराया कि सहयोग नहीं करने पर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि, मामले को गोपनीय रखें। इसके बाद आरोपियों ने “जांच” के नाम पर पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करने को कहा और भरोसा दिलाया कि जांच के बाद रकम वापस कर दी जाएगी। डर के चलते पीड़ित ने 25 से 29 अक्टूबर के बीच 12 ट्रांजेक्शन में कुल 23,28,770 UPI, Paytm और RTGS के माध्यम से आरोपियों को भेज दिए।

तकनीकी जांच से बैंगलूरू तक पहुंची पुलिस
मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ IT एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन, UPI ID, मोबाइल नंबर और KYC डिटेल्स की जांच के बाद आरोपियों का लोकेशन बैंगलूरू में मिला। जांच अधिकारी मोहन भारद्वाज के नेतृत्व में टीम ने बैंगलूरू पहुंचकर स्थानीय पुलिस की मदद से विग्नेश पी (29) और स्टीफन थॉमस (54) को गिरफ्तार किया।

दुबई से ऑपरेट हो रहा था अंतरराष्ट्रीय गिरोह
पूछताछ में खुलासा हुआ कि, इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड फिरोज खान उर्फ डॉम्निक, जो वर्तमान में दुबई में रहता है। दुबई में वीजा और डॉक्यूमेंट्स के नाम पर लोगों की जानकारी जुटाता था, उन्हीं डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल कर साइबर फ्रॉड करता था। भारत में अपने एजेंट्स के जरिए बैंक खातों में पैसे मंगवाता था। गिरोह डिजिटल अरेस्ट, आधार/सिम लिंकिंग, क्रिप्टो निवेश और फर्जी लोन ऐप्स के जरिए देशभर में ठगी कर रहा था।

‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती
SSP शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि, कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी की धमकी नहीं देती है। “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। अज्ञात कॉल, लिंक या धमकी से घबराएं नहीं, किसी भी स्थिति में बैंक डिटेल्स शेयर न करें। संदेह होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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