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महंगाई का नया झटका: घरेलू LPG सिलिंडर 29 रुपए महंगा, दिल्ली में कीमत 942 रुपए पहुंची

 Newsbaji  |  Jun 07, 2026 10:51 AM  | 
Last Updated : Jun 07, 2026 10:51 AM
आम आदमी पर महंगाई की मार, LPG सिलिंडर हुआ महंगा
आम आदमी पर महंगाई की मार, LPG सिलिंडर हुआ महंगा

दिल्ली। महंगाई की मार झेल रहे आम उपभोक्ताओं को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं, जिसके बाद 14.2 किलोग्राम वाले बिना सब्सिडी घरेलू एलपीजी सिलिंडर के दाम देशभर के विभिन्न शहरों में बढ़ गए हैं।

राजधानी दिल्ली में अब घरेलू गैस सिलिंडर 942 रुपये में उपलब्ध होगा, जबकि पहले इसकी कीमत 913 रुपये थी। लगातार बढ़ती गैस कीमतों से मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।

तीन महीनों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी

घरेलू एलपीजी सिलिंडर के दामों में पिछले तीन महीनों के भीतर यह दूसरी बड़ी वृद्धि है। इससे पहले 7 मार्च को गैस सिलिंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। लगातार बढ़ रही कीमतों से रसोई का खर्च बढ़ता जा रहा है।

प्रमुख शहरों में घरेलू LPG सिलिंडर की नई कीमतें

शहर नई कीमत (₹)
नई दिल्ली 942.00
लखनऊ 979.50
कोलकाता 968.00
चेन्नई 957.50
पटना 1,031.50
मुंबई 941.50
हैदराबाद 994.00
गुरुग्राम 950.50
नोएडा 939.50
जयपुर 945.50
तिरुवनंतपुरम 951.00
भुवनेश्वर 968.00
चंडीगढ़ 951.50

घरेलू गैस के दाम बढ़ने से रसोई का खर्च बढ़ गया है। ऐसे समय में जब खाद्य पदार्थों, परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को लेकर भी उपभोक्ता दबाव महसूस कर रहे हैं, गैस सिलिंडर की नई कीमतों ने परिवारों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

हालांकि, पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे प्रभाव इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हैं। उद्योग जगत का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है।

इस बीच, महंगाई और बढ़ती ऊर्जा कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे सरकार की विफलता बता रहा है, वहीं सरकार और उद्योग से जुड़े पक्ष वैश्विक परिस्थितियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में जल्द स्थिरता नहीं आती है, तो उपभोक्ताओं को आने वाले समय में भी कीमतों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

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