रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपनी गिरफ्तारी का डर सताने लगा है। उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शराब, कोयला और महादेव सट्टा एप घोटालों में नाम आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जिसकी सुनवाई सोमवार यानि 04 अगस्त 2025 को होने वाली है। बघेल ने याचिका में मांग की है कि, उन्हें इन मामलों में किसी भी तरह से गिरफ्तार न किया जाए और जांच में सहयोग करने का अवसर दिया जाए।
जांच एजेंसियों की रडार पर
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि, जिस तरह उनके बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी राजनीतिक द्वेष के चलते की गई है, उसी तरह उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि, राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उनकी गिरफ्तारी की जा सकती है। यह याचिका ऐसे समय में दाखिल की गई है, जब राज्य और केंद्र की जांच एजेसिंया जिनमें CBI, ED और EOW ने संबंधित मामलों की जांच तेज कर दी है। इससे पहले शराब घोटाले में जेल में बंद पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा ने भी सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी से राहत की मांग करते हुए इसी प्रकार की याचिका दाखिल की थी।
पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे की पहले ही हो चुकी है गिरफ्तारी
केन्द्रीय जेल रायपुर में बंद उनके बेटे चैतन्य बघेल की भी जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई है, जिसकी सुनवाई सोमवार को ही होनी है। चैतन्य बघेल की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि, न तो उनका नाम शराब घोटाले की ED एफआईआर में है और न ही किसी के बयान में उनका उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद राजनीतिक द्वेष के तहत उनकी गिरफ्तारी की गई है।
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