गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल्य क्षेत्र को डायरिया ने अपनी चपेट में ले लिया है। गौरेला ब्लॉक के आदिवासी बैगा बाहुल्य गांव बेंदरापानी में डायरिया तेजी से फैला रहा है और डायरिया से पीड़ित बैगा आदिवासी पिता और बेटी की मौत भी हो गई है। मौत के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
बता दे कि, अभी इस क्षेत्र में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के 18 से ज्यादा लोग डायरिया से पीड़ित हैं, जिनका इलाज गौरेला स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है। दरअसल, यह जिला प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के प्रभार में भी आता है। इसके बावजूद भी लोगों की मौते डायरिया से हो रही है, जो काफी चिंता का विषय है।
हालात गंभीर
मिली जानकारी के अनुसार, बैगा आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत साल्हेघोरी के आश्रित गांव बेंदरापानी में डायरिया फैलने से लोग काफी चिंताजनक है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरेला में डायरिया के 18 से अधिक पीड़ित ग्रामीण भर्ती हैं। गांव में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में एक ही परिवार के कलेश बैगा और उनकी बेटी मंगली बाई शामिल हैं।
नहीं हो पा रहा सही इलाज- परिजन
परिजनों ने आरोप लगाया कि, दोनों मृतकों को उल्टी और दस्त की शिकायत थी। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने मौत का कारण सीने में दर्द और अन्य कारण बताया है। मृतक के परिजनों का कहना है कि, सही समय में मरीजों को इलाज नहीं मिलने के कारण स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से पिता और बेटी की मौत हुई है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी डायरिया का प्रकोप तेजी से फैल रहा है।
दूषित पानी बनी वजह- स्वास्थ्य विभाग
वहीं, जिला स्वास्थ्य अधिकारी रामेश्वर शर्मा ने बताया कि, पिता-बेटी की मौत हुई है, वे सभी दूषित पानी पीने के कारण डायरिया से तो पीड़ित थे। इसके अलावा इन्होंने इस दौरान जहरीली जंगली मशरूम भी खाई थी, जिसके बाद इनकी हालत और भी गंभीर हो जाने के बाद मौत हो गई। जिन लोगों की मौत हुई है, वो पहले से ही क्रोनिक बीमारी से पीडि़त थे।
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