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नकटी में चला बुलडोजर, सिर्फ 48 घर नहीं गिरे, भरोसे की दीवार भी ढह गई?

 Newsbaji  |  Jun 29, 2026 04:28 PM  | 
Last Updated : Jun 29, 2026 04:28 PM
नकटी की तस्वीर: पुलिस, बुलडोजर और लोगों की बेबसी
नकटी की तस्वीर: पुलिस, बुलडोजर और लोगों की बेबसी

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में रविवार सुबह ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दो दिन पहले तक जनप्रतिनिधियों के आश्वासन से राहत महसूस कर रहे ग्रामीणों की उम्मीदें सोमवार सुबह बुलडोजर की गड़गड़ाहट के बीच टूटती नजर आईं।

आखिर अब किसका भरोसा?
27 जून 2026 को सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि बरसात के मौसम में उनके आशियाने नहीं तोड़े जाएंगे। क्षेत्रीय विधायक अनुज शर्मा ने भी वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि वे नकटी और अपने क्षेत्र की जनता के साथ खड़े हैं। इन बयानों के बाद ग्रामीणों को लगा कि फिलहाल उनके घर सुरक्षित हैं।

बरसात में बुलडोजर की कार्रवाई
लेकिन 29 जून 2026 की सुबह हालात अचानक बदल गए। आधी रात से ही गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच प्रशासनिक अमला गांव पहुंचा और चार घंटे के भीतर बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो गई। वार्ड नंबर 16 और 17 में प्रशासन ने कथित अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चलाते हुए 48 से अधिक मकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों ने विरोध भी किया, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण प्रशासन अपने अभियान पर कायम रहा।

प्रधनमंत्री आवास योजना के घर भी तोड़े
ग्रामीणों का कहना है कि वे यहां वर्षों से रह रहे हैं। कई परिवारों का दावा है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी मिले हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि अगर सरकारी योजनाओं के तहत घर स्वीकृत किए गए थे, तो अब अचानक उन्हें अतिक्रमणकारी कैसे माना जा रहा है?

वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे कर निर्माण किए गए थे और नियमानुसार उन्हें हटाना आवश्यक था।

बड़ा सवाल
नकटी की इस कार्रवाई ने अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई थी, या फिर इससे जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच भरोसे पर भी असर पड़ा है?

फिलहाल गांव में तनाव बना हुआ है, लेकिन मलबे के बीच सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है, उन लोगों की टूटी उम्मीदें, जिन्हें आखिरी समय तक अपने घर बचने की आस थी।

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