रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 में करारी हार के झटकों से उबर नहीं पाई कांग्रेस को एक और झटका उनके प्रमुख नेताओं में से एक महंत रामसुंदर दास ने दिया है. उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए पीसीसी चीफ दीपक बैज को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने अपनी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेने की बात कही है. हालांकि राजनीति के जानकारों को ये तर्क पच नहीं रहा है. असल में इसे उनकी गहरी नाराजगी माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें रायपुर दक्षिण से टिकट देकर उनकी सियासी साख को ही दांव में लगाने का फैसला पहले ही कर लिया गया था. वहां बीजेपी प्रत्याशी और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के हाथों करारी हार झेलने पड़ी है.
बता दें कि दूधाधारी मठ के महंत रामसुंदर दास कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. सबसे पहले उन्हें 2003 में जांजगीर-चांपा जिले की पामगढ़ सीट से टिकट दिया गया था. तब यह सामान्य सीट थी. इसमें उन्होंने बीएसपी के दाऊराम रत्नाकर को हराया था. इसके बाद 2008 के चुनाव में उनकी सीट बदल दी गई और जैजैपुर से मैदान में उतारा गया.
वे केशव चंद्रा को पराजित कर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे थे. इसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में जैजैपुर से ही वे केशव चंद्रा के हाथों हार गए थे. जांजगीर-चांपा जिले में ही सक्रियता के चलते इसी जिले की सीटों पर उनकी दावेदारी को मजबूत माना जा रहा था.
ऐन समय में चौंकाया था रणनीतिकारों ने
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव 2023 में अपने पत्ते काफी देर से खोले थे. उनका सबसे चौंकाने वाला फैसला रायपुर दक्षिण से टिकट देना रहा. दरअसल, यहां से बीजेपी के बृजमोहन अग्रवाल परंपरागत रूप से लड़ते आ रहे थे और बड़े मार्जिन से जीत भी रहे थे. लेकिन, महंत रामसुंदर दास को यहां से टिकट दे दिया गया. इससे सभी आशंकित थे. आखिर हुआ भी वही. एक बार फिर बड़े मार्जिन से वे जीत गए और महंत रामसुंदर दास को हार का मुख देखना पड़ा.
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