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उच्च शिक्षा संचालनालय ने जारी की अतिथि व्याख्याता (संशोधित-2026) नीति, मानदेय 50 हजार रुपए तक

 Newsbaji  |  Jul 23, 2026 10:57 AM  | 
Last Updated : Jul 23, 2026 10:57 AM
उच्च शिक्षा संचालनालय ने जारी की अतिथि व्याख्याता (संशोधित-2026) नीति, मानदेय 50 हजार रुपए तक
उच्च शिक्षा संचालनालय ने जारी की अतिथि व्याख्याता (संशोधित-2026) नीति, मानदेय 50 हजार रुपए तक

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा संचालनालय ने 'अतिथि व्याख्याता (संशोधित-2026) नीति' जारी कर दी है। नई नीति में नियुक्ति प्रक्रिया, योग्यता, मानदेय, कार्यदायित्व और सेवा शर्तों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत यदि किसी संस्थान में एक ही विषय के प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी किया जाता है, तो अभ्यर्थियों को केवल एक ही आवेदन करना होगा। चयन संबंधित विषय की मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। वहीं, अनुभव प्रमाण पत्र तभी जारी होगा, जब अतिथि व्याख्याता किसी शिक्षण सत्र में कम से कम पांच महीने तक अध्यापन करेगा।

मानदेय की व्यवस्था
संशोधित नीति के अनुसार अतिथि व्याख्याताओं को 2,000 रुपए प्रति कार्यदिवस की दर से अधिकतम 50,000 रुपए प्रतिमाह तक मानदेय मिलेगा। अतिथि ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारियों को 1,600 रुपए प्रति कार्यदिवस (अधिकतम 40,000 रुपए प्रतिमाह), अतिथि शिक्षण सहायकों को 1,400 रुपए प्रति कार्यदिवस (अधिकतम 35,000 रुपए प्रतिमाह) तथा अतिथि ग्रंथालय एवं क्रीड़ा सहायकों को 1,200 रुपए प्रति कार्यदिवस (अधिकतम 30,000 रुपए प्रतिमाह) दिया जाएगा।

योग्यता और अन्य जिम्मेदारियां
शिक्षण, ग्रंथालय एवं क्रीड़ा सहायकों के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) में अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य किए गए हैं।

अध्यापन के अलावा अतिथि कर्मियों को प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा कार्य, नैक (NAAC) मूल्यांकन, छात्रसंघ चुनाव, खेलकूद प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी सहयोग देना होगा।

7 घंटे की ड्यूटी, अवकाश का प्रावधान
नई नीति के तहत सभी अतिथि कर्मियों के लिए प्रतिदिन 7 घंटे कार्य करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक शिक्षण सत्र में 11 सवेतन अवकाश दिए जाएंगे। इसके अलावा पीएचडी कोर्सवर्क एवं शोध कार्य के लिए तथा महिला कर्मियों को मातृत्व अवकाश के लिए 180 दिनों का अवैतनिक अवकाश देने का प्रावधान किया गया है।

शिक्षक कमी के बीच अंतरिम व्यवस्था
राज्य के कई सरकारी कॉलेज और विश्वविद्यालय लंबे समय से नियमित शिक्षकों की कमी के कारण अतिथि व्याख्याताओं पर निर्भर हैं। ऐसे में संशोधित-2026 नीति नियुक्ति प्रक्रिया को एकरूप बनाने, मानदेय और सेवा शर्तों में स्पष्टता लाने तथा शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारू संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, यह नीति नियमित नियुक्तियों का विकल्प नहीं है, बल्कि शिक्षक कमी के बीच व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था के रूप में लागू की गई है।

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