Saturday ,September 05, 2026
होमछत्तीसगढ़झीरम घाटी हत्याकांड, 5 सितंबर को आएगा NIA कोर्ट का फैसला, 10 आरोपियों पर टिकी सबकी नजर...

झीरम घाटी हत्याकांड, 5 सितंबर को आएगा NIA कोर्ट का फैसला, 10 आरोपियों पर टिकी सबकी नजर

 Newsbaji  |  Sep 05, 2026 09:02 AM  | 
Last Updated : Sep 05, 2026 09:02 AM
झीरम घाटी नक्सली हमला: 5 सितंबर को आएगा NIA कोर्ट का फैसला
झीरम घाटी नक्सली हमला: 5 सितंबर को आएगा NIA कोर्ट का फैसला

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में लंबे इंतजार के बाद अब फैसले की घड़ी आ गई है। NIA की विशेष अदालत इस मामले में 5 सितंबर को फैसला सुनाएगी। इससे पहले अदालत ने मामले की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसले को लेकर पीड़ित परिवारों के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ की नजर अदालत पर टिकी हुई है।

11 आरोपियों में से अब 10 पर होगा फैसला
झीरम घाटी मामले में कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। ऐसे में अब अदालत द्वारा 10 आरोपियों के संबंध में फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है।

मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 101 गवाहों के बयान और विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए हैं। इस मामले में अंतिम बहस 10 अगस्त को पूरी हुई थी। अंतिम बहस पूरी होने के बाद NIA की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

2013 में हुआ था झीरम घाटी का खूनी हमला
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर बड़ा हमला किया था। उस समय कांग्रेस की ओर से तत्कालीन भाजपा सरकार के खिलाफ परिवर्तन यात्रा निकाली जा रही थी। सुकमा में परिवर्तन यात्रा के कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रहा था। इसी दौरान झीरम घाटी में नक्सलियों ने काफिले को घेरकर हमला कर दिया।

इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 25 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। मृतकों में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, बस्तर के कद्दावर आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार समेत कई नेता और कार्यकर्ता शामिल थे।

महेंद्र कर्मा समेत कई बड़े नेताओं की हुई थी हत्या
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी और भयावह नक्सली घटनाओं में गिना जाता है। नक्सल विरोधी अभियान और सलवा जुडूम से जुड़े रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा भी इस हमले में मारे गए थे। उस समय छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी। हमले के बाद इसकी जांच और घटना के पीछे की परिस्थितियों को लेकर लंबे समय तक राजनीतिक और न्यायिक स्तर पर सवाल उठते रहे।

13 साल बाद फैसले का इंतजार
झीरम घाटी हत्याकांड को हुए 13 साल से अधिक समय बीत चुका है। इतने लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत के फैसले का इंतजार है।

5 सितंबर को आने वाला फैसला इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में अहम पड़ाव माना जा रहा है। पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि अदालत के निर्णय से उन्हें लंबे समय से प्रतीक्षित न्याय की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

फैसले पर पूरे प्रदेश की नजर
झीरम घाटी कांड केवल एक नक्सली हमला नहीं था, बल्कि इसने छत्तीसगढ़ की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला था। यही वजह है कि इतने वर्षों बाद भी इस मामले का फैसला प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
 

TAGS
 
admin

Newsbaji

Copyright © 2021 Newsbaji || Website Design by Ayodhya Webosoft