Saturday ,September 05, 2026
होमजुर्मफर्जी IAS तृप्ति सिंह केस में बड़ा खुलासा, AI से तैयार होते थे नकली सरकारी नियुक्ति पत्र, लखनऊ से आरोपी गिरफ्तार...

फर्जी IAS तृप्ति सिंह केस में बड़ा खुलासा, AI से तैयार होते थे नकली सरकारी नियुक्ति पत्र, लखनऊ से आरोपी गिरफ्तार

 Newsbaji  |  Sep 05, 2026 11:01 AM  | 
Last Updated : Sep 05, 2026 11:01 AM
AI से तैयार होते थे फर्जी सरकारी नियुक्ति पत्र, फर्जी IAS तृप्ति सिंह मामले में बड़ा खुलासा
AI से तैयार होते थे फर्जी सरकारी नियुक्ति पत्र, फर्जी IAS तृप्ति सिंह मामले में बड़ा खुलासा

भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी महिला IAS अफसर बनकर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देने के मामले में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि कथित गिरोह ने युवाओं का भरोसा जीतने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से असली जैसे दिखने वाले फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करवाए थे।

AI से बनता था सरकारी लेटरहेड और नियुक्ति पत्र
अशोकनगर की चंदेरी पुलिस ने मामले में अहम भूमिका निभाने वाले आरोपी प्रखर को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि प्रखर AI टूल्स की मदद से सरकारी लेटरहेड, नियुक्ति पत्र और जॉइनिंग लेटर तैयार करता था। इन दस्तावेजों को इस तरह तैयार किया जाता था कि वे पहली नजर में वास्तविक सरकारी कागजात जैसे दिखाई दें। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी लगने का भरोसा दिलाया जाता था।

तृप्ति और सुधांशु का काम था शिकार तलाशना
पुलिस के मुताबिक, कथित फर्जी IAS तृप्ति सिंह और उसका भाई सुधांशु नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाते थे। दोनों पहले संभावित पीड़ितों से संपर्क करते और सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देते थे। इसके बाद फर्जी सरकारी दस्तावेज दिखाकर उनके विश्वास को मजबूत किया जाता था। पुलिस जांच में प्रखर की भूमिका इन दस्तावेजों को तकनीकी तरीके से तैयार करने वाले व्यक्ति के रूप में सामने आई है।

मजाक और रौब से शुरू हुआ खेल, फिर बन गया ठगी का नेटवर्क
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि शुरुआत में यह पूरा खेल मजाक और रौब जमाने के लिए शुरू किया गया था। चंदेरी के एक टूरिस्ट गाइड की बेटी को कथित तौर पर पहली बार निशाना बनाया गया। जब आरोपियों को इसमें सफलता मिली और इसके बदले पैसे मिलने लगे, तो धीरे-धीरे यह गतिविधि संगठित ठगी के नेटवर्क में बदल गई।

अब तक कितने युवाओं से ठगी? पुलिस खंगाल रही पूरा नेटवर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल के बाग सेवानिया थाना पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश कर 7 सितंबर तक पुलिस रिमांड हासिल की है।

अब पुलिस कई अहम सवालों के जवाब तलाश रही है-

  • गिरोह ने अब तक कितने बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया?
  • युवाओं से कुल कितनी रकम वसूली गई?
  • फर्जी नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेज कितने लोगों को दिए गए?
  • AI से दस्तावेज तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यम क्या हैं?
  • इस नेटवर्क में तृप्ति, सुधांशु और प्रखर के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं?

पुलिस अब आरोपियों के संपर्कों, डिजिटल गतिविधियों और कथित लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस कथित फर्जीवाड़े के वास्तविक दायरे और ठगी की कुल रकम का पता चल सकेगा।

AI के गलत इस्तेमाल ने बढ़ाई चुनौती
यह मामला तकनीक के दुरुपयोग से जुड़े अपराध की एक नई चुनौती की ओर भी इशारा करता है। AI की मदद से तैयार किए गए वास्तविक जैसे दिखने वाले दस्तावेजों के कारण आम व्यक्ति के लिए फर्जी और असली कागजात में अंतर करना मुश्किल हो सकता है।

बहरहाल, पुलिस जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत होने के बाद ही आरोपों की अंतिम पुष्टि होगी। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

TAGS
 
admin

Newsbaji

Copyright © 2021 Newsbaji || Website Design by Ayodhya Webosoft