गरियाबंद. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में फॉरेस्ट अफसरों को आखिरकार दो दिनों में बिछड़े बच्चे को उसकी मां से मिलाने में कामयाबी मिल गई है. जी हां, मनरेगा मजदूरों को जंगल में लेपर्ड यानी तेंदुआ के करीब डेढ़ माह का शावक मिला था. तब से वन विभाग उसकी मां मादा तेंदुआ से उसे मिलाने के लिए प्रयास में लगा था.
बता दें कि फिंगेश्वर वन परिक्षेत्र के ग्राम गनियारी में रोजगार गारंटी के तहत मजदूर मंगलवार की सुबह काम रहे थे. तभी उन्होंने एक तेंदुए के शावक को देखा. उन्होंने इसकी जानकारी गांव के सरपंच को दी. सरपंच ने इसकी सूचना वन विभाग के अफसरों को दी. तब वन अमले ने शावक को अपने पास रख लिया. साथ ही शावक की मां से उसे मिलाने के लिए अभियान शुरू किया गया.
दो दिनों के रेस्क्यू के बाद मिली सफलता
बताया जा रहा है कि वन अमला शावक को जंगल में ले जाकर एक सुरक्षित दूरी पर छोड़ रहा था, ताकि उसकी मां पास आए और उसे देखकर अपने साथ ले जाए. दिन के साथ रात में भी रेस्क्यू अभियान चलाया गया. आखिरकार अंतिम प्रयास के दौरान मादा तेंदुआ अपने बच्चे के पास पहुंच ही गई. फिर उसे अपने साथ जंगल के अंदर ले गई. इसकी पुष्टि के बाद वन अमले ने राहत की सांस ली और फिर वापस लौटे.
गांववालों ने ली राहत की सांस
बता दें कि तेंदुए का शावक मिलने के बाद से वन अमले ने गांववालों को अलर्ट कर दिया था कि अपने बच्चे की तलाश में मादा तेंदुआ गांव में भी आ सकती है. इसके बाद से गांववाले भी दहशत में थे. अब जब शावक अपनी मां के पास पहुंच चुका है तो उन्होंने भी राहत की सांस ली है.
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