अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। इस ठगी के जाल में आम लोगों से लेकर खास भी फस रहे है। अब अंबिकापुर में पदस्थ CRPF का एक एसआई 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट का शिकार रहा। उसके खाते से गैर कानूनी काम होने का भय दिखा कर 22 लाख रुपए ऑनलाइन ठग लेने का मामला सामने आया है। उसने गिरफ्तारी के डर से पत्नी के जेवर गिरवी रखकर व बेटे के नाम की एफडी तोड़कर फ्रॉड करने वालों द्वारा बताए गए अलग-अलग खातों में 22 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। अब पूरे मामले की रिपोर्ट गांधीनगर थाने में दर्ज कराई गई है।
डिजिटल अरेस्ट की पूरी कहानी
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल अंबिकापुर में SI के पद पर पदस्थ आर. महेन्द्रन, 5 जून 2025 की सुबह करीब 9:23 बजे सीआरपीएफ कैंप अंबिकापुर में थे। इसी बीच एक व्यक्ति ने मोबाइल पर कॉल कर कहा कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट गवर्मेंट ऑफ इंडिया दिल्ली से रविशंकर बोल रहा हूं। आपके आधार से सिम कार्ड लिया गया है और उक्त सिम से गैर कानूनी काम हो रहे हैं। आपका सिम को 2 घंटे में बंद कर दिया जाएगा और इसकी रिपोर्ट दिल्ली पुलिस में की जा रही है। कुछ देर बाद दोबारा दिल्ली पुलिस के नाम पर एक व्यक्ति ने फोन कर सीआरपीएफ के एसआई का नाम पूछा। इसके बाद उसके मोबाइल पर वीडियो कॉल किया। सामने वाला व्यक्ति पुलिस यूनिफॉर्म में था। उसने अपना आईडी कार्ड दिखाते हुए कहा कि, आपके आधार से बैंक ऑफ बड़ौदा नेहरू पैलेस दिल्ली में 23 जनवरी 2025 को खाता खोला गया है। इसमें गैर-कानूनी रुपयों का लेन-देन हो रहा है। सीआरपीएफ जवान ने बताया कि वह मेरा खाता नहीं है। इसके बाद उसने कहा कि इस खाते में लगभग 2 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है।
इस तरह से हुई ठगी
मामले में आरोपी ने बताया है कि उसने खाताधारक को 10 प्रतिशत कमीशन दिया है। फ्रॉड ने कहा कि आपके खाते का वेरिफिकेशन होगा। ठग ने आरबीआई का अलग-अलग खाता नंबर देकर वेरिफकेशन के नाम पर रुपए ट्रांजेक्शन करने को कहा। वेरिफिकेशन के बाद 72 घंटे के अंदर रुपए वापस खाते में भेजने की बात कही। इसी बीच वीडियो कॉल पर DCP, सीबीआई के नाम पर दूसरा व्यक्ति बात करने लगा। उसने सीआरपीएफ जवान को एक खाता नंबर दिया। उसमें 6 जून को 49 हजार 999 रुपए डालने के लिए कहा गया। सीआरपीएफ एसआई ने दिए गए खाते में सैलरी अकाउंट से रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद उसने सीआरपीएफ जवान से कहा कि, तुम्हारे खाते में जितना पैसा है उसका वेरिफिकेशन किया जाएगा। सीआरपीएफ जवान ने डर से अपने खाते का 2 लाख 58 हजार 648 रुपए दिए गए अलग-अलग खाते में ट्रांसफर कर दिए।
डर का बनाया माहौल
फ्रॉड द्वारा 8 जून 2025 को दोबारा फोन कर सीआरपीएफ एसआई को बताया गया कि, वेरिफिकेशन में 17 हजार अपराधी के खाते से मैच करता है। इसमें आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस बनता है और आज शाम तक गिरफ्तारी की जाएगी। फिर भी आपको बचाने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में बात करूंगा। इसके बाद फोन काट दिया और थोड़ी देर बाद दोबारा कॉल कर बताया गया कि तुम कल तक 10 लाख रुपए का इंतजाम करो। तुम्हारे परिवार को खतरा हो सकता है, इसलिए ये बात किसी को मत बताना। एसआई ने डर से किसी को नहीं बताया और हर घंटे व्हाट्सअप पर उसे अपनी सारी रिपोर्ट देता रहा।
एसआई के पास 9 जून 2025 को दोबारा फोन आया और कहा गया कि, रुपए की व्यवस्था हुई की नहीं। एसआई के मना करने पर कहा गया कि 10 लाख नहीं दोगे तो बेल नहीं हो पाएगा और शाम तक गिरफ्तारी कर ली जाएगी। डर से सीआरपीएफ जवान ने पत्नी के जेवर बैंक में गिरवी रखकर 10 लाख रुपए दिए गए, फ्रॉड द्वारा बताए गए खाता नंबर में ट्रांसफर कर दिए।
इतना ही नहीं, फ्रॉड द्वारा 10 जून 2025 को फिर से कॉल कर कहा गया कि उसे बेल मिल गई है। फोन कर बताया गया कि बेल मिल गया है। उसने बेल नोटिस एसआई के व्हाट्सएप पर भेजा। इसके बाद 11 जून 2025 को फिर से फ्रॉड ने सीआरपीएफ जवान को फोन कर बताया कि तुम्हारा व तुम्हारे परिवार के सदस्यों का एफडी व इश्योरेंस का भी वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इसके लिए 7 लाख रुपए की व्यवस्था करने को कहा गया, इसके बाद ही छुटकारा मिलने की बात कही गई।
सीआरपीएफ एसआई ने डर कर अपने बेटे की एफडी तोडक़र 5 लाख 1140 रुपए दिए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद फ्रॉड्स करने वालों ने कहा कि वेरिफिकेशन के बाद आपके सारे रुपए वापस कर दिया जाएंगे, जिस-जिस खाते से रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ 18 हजार रुपए वापस नहीं किए जाएंगे। क्योंकि ये रुपए अपराधी की बातों से मैच कर रहे हैं। इसके बाद ठग का मोबाइल बंद हो गया।
ठगी का सिलसिला
17 दिनों तक ठगी का सिलसिला चलने के बाद जब 23 जून 2025 को ठगों का मोबाइल बंद बताने लगा तो सीआरपीएफ, एसआई को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने मामले की रिपोर्ट गांधीनगर थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात मोबाइल नंबरों को संचालित करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपियों का सुराग पुलिस लगाने में अभी तक असफल रही है।
डिजिटल अरेस्ट- एक प्रकार का स्कैम
जानकार बताते है कि, यह एक प्रकार की साइबर ठगी है। यह लोगों का शोषण करने के लिए एक नया और खतरनाक तरीका है। इस शब्दावली के दो हिस्से हैं, डिजिटल अरेस्ट और स्कैम या ठगी। इससे पहले की हम डिजिटेल अरेस्ट को समझें, यहां यह जानना बहुत जरूरी है कि कानून में इस तरह का कोई शब्द नहीं है। डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक भ्रामक रणनीति है।
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