रायपुर। छत्तीसगढ़ में अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवाओं को उद्योग का दर्जा देने की राज्य सरकार की पहल पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिकित्सा प्रकोष्ठ के डॉ. राकेश गुप्ता ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में 12 जनवरी 2026 को किए गए संशोधन की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा पात्रता शर्तें स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक निजी निवेश की राह में बाधा बन सकती हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि, अस्पतालों को उद्योग का दर्जा देने का उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार, निजी निवेश को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर पैदा करना होना चाहिए। लेकिन वर्तमान प्रावधानों में बेड क्षमता से जुड़ी कठोर शर्तों के कारण छोटे और मध्यम आकार के अस्पताल निवेश प्रोत्साहन से बाहर हो सकते हैं।
200 बेड की अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग
उन्होंने कहा कि, मूल औद्योगिक विकास नीति में न्यूनतम 50 बेड वाले एलोपैथिक, आयुष, नेचुरोपैथी अथवा इंटीग्रेटेड अस्पतालों को Health & Wellness Centre श्रेणी में शामिल किया गया था। संशोधन के बाद विभिन्न क्षेत्रों के लिए पात्रता शर्तें अलग-अलग और अधिक कठोर कर दी गई हैं। रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, दुर्ग, जगदलपुर, अंबिकापुर, धमतरी, राजनांदगांव, बलौदाबाजार तथा नवा रायपुर के जिला मुख्यालय विकासखंडों में मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों के लिए न्यूनतम 200 बेड तथा निर्धारित मानकों के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों को पेरोल पर रखना जरूरी किया गया है। वहीं अन्य क्षेत्रों में न्यूनतम 100 बेड तथा बस्तर और सरगुजा संभाग में 50 बेड की अलग-अलग शर्तें निर्धारित की गई हैं।
छोटे और मध्यम अस्पतालों को भी मिले प्रोत्साहन
डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि, टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा जिला स्तर पर संचालित 50 से 100 बेड के अस्पताल स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण जरूरत पूरी करते हैं। ऐसे अस्पताल मरीजों को स्थानीय स्तर पर प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ बड़े शहरों की ओर होने वाले रेफरल को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि निवेश प्रोत्साहन का आधार केवल अस्पताल में उपलब्ध बेड की संख्या नहीं होना चाहिए। इसके लिए वास्तविक निवेश, रोजगार सृजन, सेवा क्षमता, स्थानीय स्वास्थ्य जरूरत और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को भी प्रमुख मानदंड बनाया जाना चाहिए।
हर जिले में सिर्फ 10 अस्पतालों को प्रोत्साहन देने के प्रावधान पर भी सवाल
डॉ. गुप्ता ने औद्योगिक विकास नीति में प्रत्येक जिले में केवल प्रथम 10 अस्पतालों को निवेश प्रोत्साहन दिए जाने के प्रावधान की भी समीक्षा की मांग की है। यदि किसी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता अधिक है तो केवल संख्या के आधार पर निवेश प्रोत्साहन सीमित करने से भविष्य में होने वाले निजी निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं की मांग और क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखकर प्रोत्साहन की व्यवस्था की जानी चाहिए।
बस्तर और सरगुजा में अधिक आकर्षक प्रोत्साहन की मांग
कांग्रेस नेता ने बस्तर, सरगुजा और अन्य अपेक्षाकृत कम विकसित क्षेत्रों में निजी स्वास्थ्य निवेश को आकर्षित करने के लिए अधिक आकर्षक और आवश्यकता-आधारित प्रोत्साहन देने की मांग की। राज्य के सभी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का संतुलित विकास तभी संभव है, जब निवेशकों को उनकी वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रोत्साहन दिया जाए।
गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से समझौता नहीं
अस्पतालों को उद्योग का दर्जा देने के साथ गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सकीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। औद्योगिक प्रोत्साहन की पात्रता ऐसी होनी चाहिए, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों में निवेश को बढ़ावा दे और नए निवेश के लिए अनावश्यक प्रवेश बाधा भी न बने।
उन्होंने राज्य सरकार से स्वास्थ्य क्षेत्र के निवेशकों और अस्पताल प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद स्थापित करने की मांग की। डॉ. गुप्ता ने कहा कि रचनात्मक संवाद के माध्यम से नीति को अधिक निवेश-अनुकूल, स्वास्थ्य जरूरतों पर आधारित और जनहितकारी बनाया जा सकता है।
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