राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा संगठनात्मक झटका लगा है। डोंगरगढ़ शहर भाजपा मंडल के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम से जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और भाजपा संगठन के सामने नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
इस्तीफा पत्र वायरल
सोशल मीडिया पर भाजपा जिलाध्यक्ष के नाम संबोधित एक सामूहिक इस्तीफा पत्र भी वायरल हो रहा है। पत्र में संगठन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कई आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, पत्र की प्रामाणिकता और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
शहर मंडल अध्यक्ष की कार्यशैली पर नाराजगी
इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं का आरोप है कि, डोंगरगढ़ शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नौआना के नेतृत्व में संगठन में वरिष्ठ और समर्पित कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की गई। उनका कहना है कि संगठन के महत्वपूर्ण निर्णय कुछ चुनिंदा नेताओं के प्रभाव में लिए जा रहे हैं, जिससे लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ता गया।
इस्तीफा पत्र में गंभीर आरोप
सामूहिक इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया गया है कि, शहर मंडल अध्यक्ष पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रामजी भारती और कुछ स्थानीय नेताओं का प्रभाव है। पत्र में यह भी कहा गया है कि संगठन में विभिन्न पदों पर बार-बार सीमित लोगों को ही अवसर दिया गया, जबकि वर्षों से सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियों से दूर रखा गया। कार्यकर्ताओं ने संगठन में गुटबाजी, पक्षपात और परिवारवाद को बढ़ावा देने के भी आरोप लगाए हैं।
युवा मोर्चा की नियुक्तियों पर भी सवाल
भाजपा युवा मोर्चा के शहर अध्यक्ष पद पर हुई नियुक्ति को लेकर भी असंतोष जताया गया है। इस्तीफा देने वाले सदस्यों का आरोप है कि नियुक्तियों में योग्यता और संगठनात्मक योगदान की बजाय व्यक्तिगत संबंधों को प्राथमिकता दी गई।
भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, अभी तक शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नौआना, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रामजी भारती, भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत अथवा पार्टी संगठन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, लोकसभा और निकाय चुनावों के बाद भाजपा संगठन के भीतर इस स्तर पर सामने आया असंतोष संगठन के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व नाराज कार्यकर्ताओं से संवाद कर विवाद का समाधान कैसे निकालता है।
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