लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना तेज हो गई है। प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इस बीच पंचायतीराज विभाग ने गांवों में प्रशासक नियुक्त करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दिया है।
हालांकि, पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि, अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है और प्रस्ताव मुख्यमंत्री के विचाराधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, इसलिए चुनाव समय पर नहीं होने की स्थिति में प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं।
क्यों टल रहे हैं पंचायत चुनाव? वोटर लिस्ट बनी बड़ी वजह
ग्राम पंचायतों की अंतिम मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित होनी है, जबकि मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया समय पर पूरी होना मुश्किल माना जा रहा है।
OBC आरक्षण पर अटका मामला
राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग गठन का प्रस्ताव मंजूर किया है। आयोग की रिपोर्ट आने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं। रिपोर्ट के बाद ही आरक्षण का अंतिम निर्धारण होगा।
राजनीतिक रणनीति भी अहम
सूत्रों के मुताबिक, सरकार पंचायत चुनाव को 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराने से ग्रामीण राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समय पर पंचायत चुनाव कराने को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। अदालत के रुख पर भी आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी।
प्रधान संगठन ने रखी प्रशासनिक समिति की मांग
राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात कर प्रशासनिक समिति बनाने की मांग की है।
संगठन चाहता है कि:
मौजूदा ग्राम प्रधान, वार्ड सदस्य और ग्राम पंचायत सहायकों को समिति में शामिल किया जाए, ताकि गांवों का कामकाज स्थानीय स्तर पर चलता रहे।
प्रशासक नियुक्ति पर उठ रहे सवाल
प्रधान संगठनों का कहना है कि, बाहरी प्रशासक नियुक्त होने से कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल
संगठन का दावा है कि, 2021 में प्रशासक व्यवस्था के दौरान करीब 4,000 करोड़ रुपए के खर्च का स्पष्ट हिसाब नहीं मिल पाया था।
स्थानीय समस्याओं की समझ का अभाव
ग्राम प्रधान स्थानीय सामाजिक और पारिवारिक जरूरतों को बेहतर समझते हैं, जबकि बाहरी अधिकारी गांव की संवेदनशील परिस्थितियों से परिचित नहीं होते।
कानून-व्यवस्था और चुनावी तैयारी पर असर
ग्रामीण स्तर पर शांति व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के संचालन में भी स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका अहम मानी जाती है।
कानून क्या कहता है?
पंचायतीराज अधिनियम 1947 की धारा 12(3A) के तहत यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते हैं, तो राज्य सरकार या जिलाधिकारी प्रशासक अथवा प्रशासनिक समिति नियुक्त कर सकते हैं।
क्या होगा आगे?
अब सबकी नजरें तीन बिंदुओं पर टिकी हैं:
यदि चुनाव लंबे समय तक टलते हैं, तो उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में चुनी हुई पंचायतों की जगह प्रशासनिक नियंत्रण की व्यवस्था लागू हो सकती है, जिसका असर स्थानीय राजनीति और ग्रामीण विकास दोनों पर पड़ेगा।
क्वेटा में रेलवे ट्रैक के पास बड़ा धमाका, 24 की मौत; ट्रेन के 3 डिब्बे पटरी से उतरे
UPSSSC Excise Constable Recruitment 2026: 722 पदों पर भर्ती, 4 जून से आवेदन शुरू
Copyright © 2021 Newsbaji || Website Design by Ayodhya Webosoft