दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबंसिरी जिले के सीमावर्ती इलाके ताक्सिंग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की कथित मौजूदगी और भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को लेकर उठे सवालों के बीच अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और लंबे समय तक मोदी सरकार का हिस्सा रहे आर.के. सिंह ने सीधे केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
सोशल मीडिया पर जारी किया वीडियो
आर.के. सिंह ने एक वीडियो जारी कर सवाल उठाया है कि, वर्ष 2014 से अब तक भारत ने कितने पेट्रोलिंग प्वाइंट छोड़े हैं? उन्होंने विशेष रूप से ताक्सिंग के ‘शेरा-5’ पेट्रोलिंग प्वाइंट का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी भारतीय पेट्रोलिंग प्वाइंट पर चीन ने स्थायी मौजूदगी बना ली है, तो यह गंभीर रणनीतिक चिंता का विषय है।
देखिए वीडियों: https://x.com/rajksinghindia/status/2087822708893757864?s=48
पेट्रोलिंग प्वाइंट छोड़ने का मतलब क्या?
आर.के. सिंह ने कहा कि, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद में पेट्रोलिंग महज गश्त नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के क्षेत्रीय दावों का एक महत्वपूर्ण संकेतक भी है। उनके मुताबिक, भारत जिस क्षेत्र को अपना मानता है, वहां तक भारतीय सुरक्षा बल पेट्रोलिंग करते हैं। इसी तरह चीन भी अपने दावे वाले इलाके में गश्त करता है। ऐसे में किसी इलाके में भारतीय पेट्रोलिंग का रुकना या पेट्रोलिंग प्वाइंट छोड़ना भविष्य में सीमा विवाद से जुड़ी बातचीत पर असर डाल सकता है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि, अगर शेरा-5 को लेकर सामने आई खबर सही है, तो यह जानना जरूरी है कि वर्ष 2014 के बाद ऐसे कितने पेट्रोलिंग प्वाइंट हैं जहां भारत की पेट्रोलिंग बंद हुई है।
प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से मांगा जवाब
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपने वीडियो में कहा कि, देश को यह जानने का अधिकार है कि आखिर वर्ष 2014 से अब तक कितने पेट्रोलिंग प्वाइंट छोड़े गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ताक्सिंग का शेरा-5 ही ऐसा एकमात्र पेट्रोलिंग प्वाइंट है जिसे भारत ने छोड़ दिया और जहां चीन ने अपनी मौजूदगी कायम कर ली, या फिर ऐसे और भी इलाके हैं? आर.के. सिंह ने इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से जवाब मांगा है।
ताक्सिंग पर स्थानीय टीम के दावे से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद उस समय तेज हुआ जब पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल प्रदेश (PPPA) की एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने ताक्सिंग क्षेत्र का दौरा करने के बाद चीन की कथित गतिविधियों को लेकर चिंता जताई। टीम की ओर से दावा किया गया कि PLA भारतीय सीमा के अंदर आकर अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है और कुछ इलाकों में भारतीय सेना की नियमित पेट्रोलिंग प्रभावित हुई है।
हालांकि, केंद्र सरकार और अरुणाचल प्रदेश की सरकार ने भारतीय क्षेत्र पर चीन के कब्जे के दावे को खारिज किया है। इसलिए इस मामले में स्थानीय दावों और सरकारी स्थिति के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
चीन से सीमा विवाद की पुरानी पृष्ठभूमि
आर.के. सिंह ने अपने वीडियो में भारत-चीन सीमा विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन मैकमोहन लाइन को स्वीकार नहीं करता और अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता रहा है। इसी वजह से वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर दोनों देशों की पेट्रोलिंग का रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है। भारत-चीन सीमा पर LAC का पूरा पारस्परिक निर्धारण आज भी नहीं हुआ है। ऐसे में दोनों देशों की पेट्रोलिंग गतिविधियां यह दिखाने का एक माध्यम भी बनती हैं कि संबंधित देश जमीन पर अपने दावे को किस सीमा तक मानता है।
पेट्रोलिंग बंद हुई तो वजह क्या थी?
ताक्सिंग विवाद में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि शेरा-5 पर भारतीय पेट्रोलिंग में बदलाव आया है, तो उसका वास्तविक कारण क्या है? क्या यह किसी सैन्य या स्थानीय व्यवस्था के तहत हुआ? क्या वहां कोई बफर व्यवस्था बनी है? क्या भारत और चीन के बीच किसी सहमति के तहत पेट्रोलिंग सीमित हुई? या फिर वास्तव में चीन ने उस इलाके में अपनी स्थायी मौजूदगी स्थापित कर ली है? इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।
आर.के. सिंह के सवाल से सरकार पर दबाव
उनका बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि, वह लंबे समय तक भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था और केंद्र सरकार के बेहद महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। वह गृह सचिव रह चुके हैं और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। हालांकि वह 2025 में बीजेपी से इस्तीफा दे चुके हैं और इसके बाद कई मुद्दों पर अपनी पूर्व पार्टी और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। ताक्सिंग का मुद्दा अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सीमा प्रबंधन, राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत के क्षेत्रीय दावे से जुड़ा सवाल बनता दिख रहा है।
अब सरकार से देश जानना चाहता है ये सवाल
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