बलौदाबाजार। स्कूल को बच्चों के सुरक्षित भविष्य की पाठशाला माना जाता है, लेकिन जब शिक्षक ही छात्राओं की सुरक्षा के लिए खतरा बन जाए तो यह बेहद गंभीर मामला बन जाता है। बलौदाबाजार जिले में 9 नाबालिग छात्राओं के साथ अनुचित हरकत और यौन उत्पीड़न के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी शिक्षक तिलक राम वर्मा को 6 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी पलारी थाना क्षेत्र के टीपावन स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में प्रभारी प्राचार्य के पद पर पदस्थ था।
स्टाफ रूम में बुलाकर छात्रा से की थी अश्लील हरकत
मामले के अनुसार, आरोपी शिक्षक ने एक छात्रा को उसके पिता का हालचाल पूछने के बहाने स्टाफ रूम में बुलाया था। बातचीत के दौरान उसने कथित तौर पर छात्रा की पीठ और कमर पर हाथ फेरा तथा उसके सीने को छूने की कोशिश की। शिक्षक की इस हरकत से घबराई छात्रा वहां से भाग निकली।
गुड टच-बैड टच की जानकारी बनी खुलासे की वजह
इस पूरे मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया, जब स्कूल की एक शिक्षिका ने छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बारे में जागरूक किया। शिक्षिका ने बच्चों को समझाया कि कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से छूने की कोशिश करे तो इसकी जानकारी तत्काल माता-पिता या भरोसेमंद शिक्षक को दें।
इसी दौरान शिक्षिका ने छात्राओं से पूछा कि क्या उनके साथ भी कभी ऐसी घटना हुई है? इस पर एक छात्रा ने हिम्मत जुटाकर अपने साथ हुई घटना की जानकारी शिक्षिका और अपनी मां को दी।
एक छात्रा की शिकायत सामने आने के बाद स्कूल की अन्य छात्राओं ने भी आरोपी शिक्षक के खिलाफ इसी तरह की अनुचित हरकतों के आरोप लगाए। इस तरह कुल 9 नाबालिग छात्राओं से जुड़े मामले का खुलासा हुआ और शिकायत पुलिस तक पहुंची।
28 गवाहों की गवाही बनी अहम आधार
छात्राओं की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। पुलिस ने जांच के बाद साक्ष्य जुटाए और न्यायालय में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 28 गवाहों के बयान अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। छात्राओं के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी शिक्षक को दोषी ठहराया।
पॉक्सो एक्ट में 6 वर्ष का सश्रम कारावास
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत 6 वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने से दंडित किया। इस प्रकार आरोपी को अधिकतम 6 वर्ष का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
एक छात्रा की हिम्मत ने खोली कई शिकायतों की राह
इस मामले में गुड टच-बैड टच की जानकारी मिलने के बाद एक छात्रा का सामने आना और फिर अन्य छात्राओं का भी शिकायत करना बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। यह घटना बताती है कि बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच अंतर समझाना कितना जरूरी है।
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