रायपुर। अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस के अवसर पर जन संस्कृति मंच (जसम) द्वारा आयोजित ‘मज़दूर ज़िंदाबाद’ कार्यक्रम में श्रमिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक प्रतिरोध के मुद्दों पर जोरदार चर्चा हुई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने देश के मौजूदा सामाजिक-आर्थिक हालात पर चिंता जताते हुए मज़दूरों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हो रही कार्रवाई की आलोचना की।
जसम छत्तीसगढ़, अध्यक्ष रूपेंद्र तिवारी ने कहा कि देश की सत्ता उन हाथों में है, जिनका न तो स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव रहा है और न ही श्रमिक संघर्षों से। उन्होंने आरोप लगाया कि, हाल के दिनों में गुड़गांव-मानेसर, नोएडा, फरीदाबाद और पानीपत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में मज़दूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ हुई घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि असहमति की आवाज़ों को दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि, “जब-जब हमले तेज़ होते हैं, संघर्ष भी उतना ही मजबूत होता है।”
कार्यक्रम में जन कवि वासुकी प्रसाद उन्मत्त और मजदूर साथी भागीरथी वर्मा का सम्मान किया गया। वासुकी प्रसाद ने रेलवे में खलासी के रूप में अपने अनुभव साझा किए, जबकि भागीरथी वर्मा ने बताया कि किस तरह उन्होंने नौकरी से निकाले जाने के बाद कानूनी लड़ाई लड़कर अपना हक हासिल किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। सुनीता शुक्ला ने गोरख पांडेय का गीत प्रस्तुत किया, वहीं समीक्षा नायर, अजुल्का सक्सेना, नीलिमा मिश्रा और अन्य रचनाकारों ने गीत, कविता और ग़ज़लों के माध्यम से श्रमिक जीवन के संघर्ष और संवेदनाओं को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में जसम रायपुर की ओर से एक निंदा प्रस्ताव पारित कर हालिया गिरफ्तारियों पर चिंता जताई गई और सत्यम वर्मा सहित अन्य साथियों की शीघ्र रिहाई की मांग की गई।
कार्यक्रम का संचालन लेखिका सनियारा खान ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन राजकुमार सोनी ने किया। इस अवसर पर पीसी रथ, अखिलेश एडगर, मोहित जायसवाल, इंद्र कुमार राठौर, किशनलाल सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और साहित्यकार उपस्थित रहे।
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