कांकेर। जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्रावासों में पढ़ने वाले दो मासूम बच्चों की मौत के बाद अब मलेरिया से एक और मौत का मामला सामने आया है। ताजा घटना भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम चीज़गांव की है, जहां मलेरिया पॉजिटिव महिला की इलाज में कथित लापरवाही और 108 एंबुलेंस के विलंब से पहुंचने के बीच मौत हो गई। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम चीज़गांव के आवास पारा निवासी राकेश्वरी कल्लो की मंगलवार सुबह मौत हो गई। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि 27 जुलाई को गांव की मितानिन ने महिला की जांच की थी, जिसमें वह मलेरिया पॉजिटिव पाई गई थीं। मितानिन ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देने के साथ ही महिला को मलेरिया की दवा भी उपलब्ध कराई थी।
स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण करने गांव नहीं पहुंची। मंगलवार सुबह महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गईं। इसके बाद 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन एंबुलेंस करीब डेढ़ घंटे की देरी से पहुंची। गंभीर हालत में महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद नहीं थमा मलेरिया
गौरतलब है कि, जिले में बढ़ते मलेरिया के मामलों को देखते हुए 27 जुलाई को कांकेर कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने तथा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
स्वास्थ्य मंत्री ने भी किया था दौरा
इधर, 28 जुलाई को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी कांकेर पहुंचे थे। उन्होंने बस्तर संभाग के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की बैठक लेकर मलेरिया नियंत्रण और रोकथाम की रणनीति की समीक्षा की थी। इसके बावजूद जिले में मलेरिया से तीसरी मौत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और जमीनी अमले की सक्रियता पर सवाल उठने लगे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, इलाज में हुई कथित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने तथा मलेरिया प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग की है। हालांकि, इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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