रायपुर. छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना शुरू होने के बाद से ही गोबर का उपयोग अलग-अलग वस्तुओं के निर्माण में किया जा रहा है. इसके तहत गोबर से ईंट, बिजली, पेंट, दीये बनाए जा रहे हैं. अब गोबर का उपयोग सीमेंट बनाने में भी किया जाएगा. छत्तीसगढ़ में संचालित एक निजी सीमेंट कंपनी ने इसके तहत अनुबंध किया है, जो हर दिन 10 मिट्रिक टन गोबर की खरीदी करेगी.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में श्री सीमेंट उद्योग ने जिला प्रशासन बलौदाबाजार-भाटापारा से अनुबंध किया है. विधानसभा परिसर रायपुर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में श्रीसीमेंट उद्योग के साथ एमओयू हुआ. इस अनुबंध के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा विकासखण्ड में स्थापित श्री सीमेंट उद्योग द्वारा गोबर खरीदने की सहमति दी गई है.
कोयले के विकल्प के रूप में होगा उपयोग
राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि कोयले की जगह ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने श्रीसीमेंट प्रतिदिन 10 मीट्रिक टन गोबर खरीदेगा. एडीशनल फ्यूल रिर्सोसेज के रूप में गोबर का भट्टी को गरम करने में कोयले के साथ उपयोग किया जाएगा. यानी कि अब सीमेंट बनाने में गोबर का भी उपयोग किया जाएगा. अधिकारियों ने बताया कि श्रीसीमेंट के सबसे समीप के गांव चण्डी में गोबर अन्य स्थानों से एकत्र कर कंपनियों को दिया जायेगा. गोबर की पूर्ति सीमेंट उद्योग के 15 किलोमीटर के परिधि वाले 16 गांव से प्रतिदिवस 10 मीट्रिक टन गोबर प्रदाय किया जाएगा. कम्पनी को अब तक 38.8 मीट्रिक टन गोबर प्रदाय किया जा चुका है.
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में 7 गौ-शालाएं हैं, जिसमें 1739 पशुओं को रखा गया है, इनमें 04 सिमगा विकासखण्ड में ही स्थित है जो 20-25 किलोमीटर की दूरी पर है. गौ-शालाओं से भी प्रति दिवस 6 मीट्रिक टन गोबर प्रदाय की संभावना है. जिले में उद्योगों के समीपस्थ लगभग 95 गांव हैं, जिसमें पशुओं की संख्या लगभग 80 हजार है. बता दें कि छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के तहत 2 प्रति किलोग्राम की दर से ग्रामीण इलाकों में राज्य सरकार पशुपालकों से गोबर की खरीदी कर रही है.
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