रायपुर/जगदलपुर। बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। NIA की विशेष अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई बुधवार को पूरी हो गई। तीन दिनों तक चली अंतिम बहस के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस बहुचर्चित मामले में 31 अगस्त 2026को फैसला सुनाया जाएगा।
मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान सोमवार को अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष अपनी अंतिम दलीलें पेश कीं। इसके बाद मंगलवार को बचाव पक्ष ने अपनी अंतिम जिरह रखी। बुधवार को भी अदालत ने बचाव पक्ष को सुना। इसके बाद अभियोजन पक्ष की ओर से रिपीटल दलीलें प्रस्तुत की गईं। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद विशेष अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखने का फैसला किया।
2013 में झीरम घाटी में हुआ था भीषण नक्सली हमला
गौरतलब है कि, 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा समेत पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौत हो गई थी।
हमले में सुरक्षाबलों के जवानों और आम नागरिकों की भी जान गई थी। यह घटना छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे बड़ी और भयावह राजनीतिक हिंसक घटनाओं में शामिल है।
NIA जांच में 27 लोगों की मौत, 35 घायल
घटना की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की थी। NIA की जांच रिपोर्ट के अनुसार झीरम हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 35 लोग घायल हुए थे। मामले में चार लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। इसके अलावा करीब 150 से 200 अन्य नक्सलियों को भी आरोपी बनाया गया।
NIA ने इस मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष 10 आरोपियों के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर स्थित NIA की विशेष अदालत में सुनवाई चल रही थी।
फैसले पर टिकीं सभी की निगाहें
अंतिम बहस पूरी होने के बाद अब अदालत के फैसले का इंतजार है। दोनों पक्षों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे अदालत के निर्णय की प्रतीक्षा करेंगे। 31 अगस्त को आने वाला फैसला इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
झीरम कांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और सामाजिक स्मृति से जुड़ी ऐसी त्रासदी है, जिसने प्रदेश की राजनीति की दिशा पर भी गहरा प्रभाव डाला। घटना के बाद कांग्रेस की ओर से तत्कालीन भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए थे और इसे राजनीतिक साजिश से जोड़कर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि इन आरोपों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर अलग-अलग स्तरों पर जांच और न्यायिक प्रक्रियाएं चलती रही हैं।
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