नारायणपुर। वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में नारायणपुर वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। धौड़ाई रेंज के गायातापारा मार्ग के पास वन विभाग की टीम ने तेंदुए की खाल की तस्करी का प्रयास करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से एक पूरी तरह सुरक्षित तेंदुए की खाल बरामद की गई है। तस्करी में इस्तेमाल की जा रही दो मोटरसाइकिलों को भी वन विभाग ने जब्त किया है।
गश्त के दौरान पकड़े गए आरोपी
वन विभाग के अनुसार, 8 अगस्त 2026 को टीम धौड़ाई रेंज क्षेत्र में नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान गायातापारा मार्ग के पास तीन संदिग्ध व्यक्ति 2 बाइकों से जाते हुए दिखाई दिए। उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर वन विभाग की टीम ने उन्हें रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से तेंदुए की खाल बरामद हुई। प्रारंभिक जांच में खाल के वयस्क तेंदुए की होने की जानकारी सामने आई है।
184 सेंटीमीटर लंबी मिली तेंदुए की खाल
वन विभाग के मुताबिक बरामद खाल पूरी तरह सुरक्षित अवस्था में थी। इसकी कुल लंबाई 184 सेंटीमीटर दर्ज की गई है। आगे के पैरों की ओर इसकी चौड़ाई 125 सेंटीमीटर, पिछले पैरों की ओर 118 सेंटीमीटर और पेट की ओर चौड़ाई 55 सेंटीमीटर है। खाल के आकार और संरचना को देखते हुए इसके वयस्क तेंदुए की होने की जानकारी दी गई है। तेंदुए की खाल की बरामदगी को वन विभाग की इस कार्रवाई की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
3 आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सोनूराम काचलाम (39) और पुनीत कुमार बघेल (32), दोनों निवासी छोटेडोंगर, तथा जमधर पोताई (50) निवासी धौड़ाई के रूप में हुई है। वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
CJM कोर्ट में पेशी, न्यायिक हिरासत में भेजे गए
गिरफ्तारी के बाद वन विभाग की टीम ने तीनों आरोपियों को नारायणपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वन विभाग के अनुसार, मामले में दोष सिद्ध होने पर संबंधित प्रावधानों के तहत अधिकतम 7 वर्ष तक की सजा हो सकती है।
कहां से आई तेंदुए की खाल? नेटवर्क की जांच शुरू
तेंदुए की खाल बरामद होने के बाद वन विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि तेंदुए का शिकार कहां किया गया था, खाल आरोपियों तक कैसे पहुंची और इसे आगे कहां ले जाया जा रहा था। इसके साथ ही वन विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि तस्करी के इस नेटवर्क में आरोपियों के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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