चिट्ठीबाजी। 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस मनाते समय यदि किसी एक कहानी ने पूरी दुनिया को यह सिखाया है कि प्रेम और विश्वास की कोई भाषा नहीं होती, तो वह है दक्षिण अफ्रीका के थुला थुला प्राइवेट गेम रिजर्व की प्रसिद्ध हथिनी नाना और महान संरक्षणवादी लॉरेंस एंथोनी की कहानी। यह केवल एक मनुष्य और एक जंगली हाथी के बीच मित्रता की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य, करुणा, कर्तव्यनिष्ठा और अटूट विश्वास की ऐसी गाथा है, जिसने लाखों लोगों को वन्यजीवों को देखने का नजरिया बदल दिया।
सन् 1999 में दक्षिण अफ्रीका में एक जंगली हाथियों के झुंड को "समस्याग्रस्त झुंड" घोषित कर दिया गया था। यदि उन्हें कोई सुरक्षित स्थान नहीं मिलता, तो उन्हें मार दिया जाता। इस झुंड का नेतृत्व उसकी निर्भीक और बुद्धिमान मुखिया (Matriarch) नाना कर रही थी। उस समय नाना के साथ उसके परिवार के छह अन्य हाथी थे। इन सातों हाथियों के सामने उनकी पूर्व मुखिया और उसके शावक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को भयभीत और असुरक्षित बना दिया था। वर्षों तक मनुष्यों से मिले इन कटु अनुभवों ने नाना का विश्वास लगभग समाप्त कर दिया था। वह केवल अपने परिवार की सुरक्षा चाहती थी।
जब इस परिवार को थुला थुला लाया गया, तब वहाँ एक भी हाथी नहीं था। उस समय तक लॉरेंस हाथियों के बारे में लगभग कुछ भी नहीं जानते थे। नाना ने इस स्थान को अपना घर मानने से इंकार कर दिया। कुछ ही दिनों में उसने लगभग 8000 वोल्ट की विद्युत बाड़ तोड़ दी और पूरे परिवार को लेकर रिज़र्व से बाहर निकल गई। वह उसी दिशा की ओर बढ़ रही थी, जहाँ के जंगल से उसे पकड़कर लाया गया था। यदि हाथी आबादी वाले क्षेत्रों में पहुँच जाते, तो उनके मारे जाने की पूरी संभावना थी। लॉरेंस ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर अथक प्रयास किए और पूरे हाथी परिवार को सुरक्षित वापस थुला थुला लाने में सफलता प्राप्त की।
नाना की स्वतंत्रता छीनकर उसे रोकना आसान था, लेकिन लॉरेंस ने इसके बजाय धैर्य और विश्वास का कठिन रास्ता चुना। उन्होंने नाना को हराने की नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे भय और अविश्वास को दूर करने की कोशिश की। वे बाड़ के पास खड़े होकर उससे धीरे-धीरे बात करते रहे। जब तक नाना और उसका परिवार शांत नहीं हो गया, तब तक लॉरेंस हर रात वहीं बाड़ के पास ही रहे। न उन्होंने उसे डराया, न दंड दिया। उन्होंने केवल धैर्य रखा। धीरे-धीरे नाना को एहसास होने लगा कि यह मनुष्य उन लोगों जैसा नहीं है, जिन्होंने उसके जीवन में केवल भय और पीड़ा दी थी। उसके भीतर उसे पहली बार खतरा नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और अपनापन दिखाई दिया।
लेकिन कुछ समय बाद नाना एक बार फिर अपने परिवार के साथ बाड़ तोड़कर बाहर निकलने वाली थी। इस बार भी लॉरेंस ने विश्वास का सहारा लिया। वे अकेले नाना के सामने जाकर खड़े हो गए और उससे बार-बार कहते रहे-
"नाना, ऐसा मत करो... मेरी बच्ची, ऐसा मत करो। यही तुम्हारा घर है। प्लीज यहाँ से मत जाओ। यदि तुम बाड़ तोड़कर बाहर निकलोगी, तो वे तुम सबको मार डालेंगे। अब तुम्हें कहीं भागने की ज़रूरत नहीं है। यदि तुम बाहर गईं, तो तुम सब मारे जाओगे। यहीं रहो। मैं तुम्हारे साथ हूं और हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा। यह जगह तुम्हारे और तुम्हारे परिवार के लिए सुरक्षित है।" एंथोनी बार-बार कहते रहे, "यदि तुम चली गईं, तो तुम सब मर जाओगे। यहीं रहो। मैं तुम्हारे साथ यहीं रहूँगा। यह एक अच्छी जगह है।" नाना ने बाड नहीं तोड़ी।
कुछ दिनों बाद जब लॉरेंस ने देखा कि पूरा परिवार शांत हो चुका है और थुला थुला को अपना घर स्वीकार कर लेगा, तब उन्होंने बाड़ का द्वार खोल दिया। परन्तु कुछ समय बाद नाना पूरे परिवार के साथ, फिर गेम रिज़र्व की विद्युत-तारों वाली बाड़ तोड़कर बाहर जाने लगी। तब लॉरेंस उसके बिल्कुल सामने, कुछ फीट की दूरी पर जाकर खड़े हो गए और फिर वही बातें दोहराने लगे-"नाना, ऐसा मत करो... मत करो।" नाना ने लॉरेंस की ओर देखा और दोनों लगभग दस मिनट तक एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे।
उसी क्षण सब कुछ बदल गया। नाना कुछ देर तक शांत खड़ी रही, फिर मुड़ी और अपने पूरे परिवार को लेकर वापस गेम रिज़र्व के भीतर चली गई। इसके बाद से आज तक यह हाथी परिवार लगभग 55 वर्ग किमी के इस रिज़र्व में स्वतंत्र रूप से रह रहा है और उसने फिर कभी रिज़र्व की बाड़ तोड़कर बाहर निकलने का प्रयास नहीं किया। यह किसी प्रशिक्षण की नहीं, बल्कि विश्वास की जीत थी। यही वह क्षण था, जब एक मनुष्य और एक जंगली हथिनी के बीच ऐसा रिश्ता बना, जिसकी मिसाल आज भी पूरी दुनिया में दी जाती है।
समय बीतता गया और नाना तथा लॉरेंस एंथोनी के बीच ऐसा रिश्ता बन गया, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। जब भी लॉरेंस एंथोनी गेम रिज़र्व के जंगल में जाते, नाना उनसे मिलने आ जाती और उन्हें अपनी सूँड से सूँघती। परन्तु वन्यजीव संरक्षण के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए लॉरेंस एंथोनी ने नाना से मिलना-जुलना भी कम कर दिया, ताकि उसका मनुष्यों के प्रति लगाव और अधिक न बढ़े और और वह अपनी प्राकृतिक स्वतंत्र अवस्था में रह सके। थुला थुला के कर्मचारियों ने कई बार एक आश्चर्यजनक बात देखी। जब भी लॉरेंस एंथोनी किसी यात्रा पर बाहर जाते और वापस लौटने वाले होते, नाना के नेतृत्व में हाथियों का परिवार गेम रिज़र्व में, उनके घर के पास आकर खड़ा हो जाता था, मानो वे अपने प्रिय मित्र की प्रतीक्षा कर रहे हों। यह आज तक कोई नहीं समझ पाया कि हाथियों को कैसे पता चल जाता था कि लॉरेंस वापस आने वाले हैं। शायद यह उनकी अद्भुत संवेदनशीलता थी, शायद उनका गहरा लगाव, या शायद प्रकृति का कोई ऐसा रहस्य, जिसे हम आज भी पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।
2 मार्च 2012 को लॉरेंस एंथोनी का अचानक हृदयाघात से निधन हो गया। इसके बाद जो घटना हुई, उसने पूरी दुनिया को भावुक कर दिया। नाना के नेतृत्व में हाथियों का परिवार स्वयं उनके गेम रिज़र्व स्थित घर पहुँचा और लंबे समय तक वहाँ शांत खड़ा रहा, मानो वे अपने उस मित्र को अंतिम विदाई देने आए हों, जिसने कभी उनके जीवन की रक्षा की थी। इस घटना ने दुनिया भर के लोगों को झकझोर दिया। आज भी इस घटना से जुड़े वीडियो YouTube पर लाखों लोग देखते हैं और हर बार यह एहसास होता है कि प्रेम, सहानुभूति और विश्वास केवल मनुष्यों की भावनाएँ नहीं हैं।
वर्षों के साथ नाना वृद्ध होती गई। बढ़ती आयु में उसे मोतियाबिंद हो गया और उसकी एक आंख की दृष्टि चली गई। तब उसने अपने परिवार के नेतृत्व की जिम्मेदारी अपनी विश्वसनीय उत्तराधिकारी फ्रैंकी को सौंप दी। बाद में फ्रैंकी की मृत्यु के पश्चात उसकी बेटी मारुला आज इस ऐतिहासिक हाथी परिवार की नई मातृसत्ता है। नाना आज लगभग 62 वर्ष की है। समय के साथ इस परिवार में नए शावकों का जन्म हुआ और अन्य हाथी भी इसमें शामिल हुए। आज थुला थुला में 28 हाथी हैं।
आज भी थुला थुला प्राइवेट गेम रिजर्व का संचालन लॉरेंस एंथोनी की पत्नी फ्रांकोइस एंथोनी उसी समर्पण और संरक्षण की भावना के साथ कर रही हैं, जिसे लॉरेंस एंथोनी ने अपने जीवन का उद्देश्य बनाया था। नाना, मारुला और उनका परिवार आज भी वहाँ आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह संदेश देता है कि प्रकृति पर अधिकार नहीं, बल्कि उसके साथ विश्वास का रिश्ता बनाया जा सकता है।
लॉरेंस एंथोनी की प्रसिद्ध पुस्तक The Elephant Whisperer केवल एक हाथी परिवार की कहानी नहीं है। यह उनके वन्यजीवों के प्रति अथाह प्रेम, धैर्य, साहस और संरक्षण के प्रति समर्पण का जीवंत दस्तावेज़ है। पूरी पुस्तक में अनेक ऐसी घटनाओं का उल्लेख है, जो पाठक को यह महसूस कराती हैं कि यदि मनुष्य प्रेम, सम्मान और धैर्य के साथ प्रकृति के पास जाए, तो जंगल भी उसे अपना लेते हैं। पुस्तक के कई प्रसंग इतने मार्मिक हैं कि वे पाठक की आँखें नम कर देते हैं।
विश्व हाथी दिवस पर नाना और लॉरेंस एंथोनी की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि विश्वास कभी शक्ति से नहीं जीता जाता, बल्कि करुणा, धैर्य और निस्वार्थ प्रेम से अर्जित किया जाता है। आज जब हाथी अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तब यह कहानी हमें याद दिलाती है कि एक संवेदनशील मनुष्य केवल एक हाथी परिवार ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सोच बदल सकता है।
लेखक की टिप्पणी : कुछ समय पूर्व मुझे अपनी पत्नी के साथ थुला थुला जाने का सौभाग्य मिला। सफारी के दौरान हमारी लैंड रोवर लगभग आधे घंटे तक मारुला और उसके परिवार के बीच खड़ी रही। उस दौरान मारुला स्वयं हमारी गाड़ी के बिल्कुल पास आई। उसने अपनी शांत आँखों से मेरी पत्नी को देखा और फिर अपनी सूंड से बड़े स्नेह और जिज्ञासा के साथ सूँघा। उस समय मारुला और मेरी पत्नी के बीच की दूरी लगभग तीन इंच रही होगी। वह क्षण अविस्मरणीय था, आखिर वह उसी हाथी परिवार की सदस्य थी, जिसे लॉरेंस एंथोनी ने थुला थुला में बसाया था। बस एक कसक रह गई कि हम नाना से नहीं मिल पाए; उस दिन वह जंगल में कहीं दूर थी।
लेखक- नितिन सिंघवी, वन्यजीव प्रेमी
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