दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर जारी विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि 48 घंटे के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं, तो संगठन की ओर से जंतर-मंतर पर दोबारा धरना दिया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपके ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया। उनके बयान में बेहद कड़े और विवादास्पद शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
किसे वोट देने की इजाजत होगी, यह तय करने का सवाल
अभिजीत दीपके ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लोकतंत्र में नागरिकों के मतदान के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता सरकार चुनती है। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि किस व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा और किसे मतदान का अधिकार मिलेगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मतदाता बनने और मतदान करने के अधिकार को लेकर निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर विवाद खड़े हो रहे हैं, तो लोकतंत्र की मूल अवधारणा पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
SIR को लेकर बढ़ रहा राजनीतिक विवाद
SIR को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी लगातार बहस जारी है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं को शामिल करने तथा अपात्र नामों को हटाने से जुड़े मुद्दे इस विवाद के केंद्र में हैं। इसी बीच कांग्रेस वर्किंग कमेटी की 29 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित बैठक में भी SIR और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा होने की बात सामने आई है।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर भी रिपोर्ट का दावा
SIR विवाद के बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने लगभग 10 महीनों की अवधि के दौरान मतदाता सूची की प्रक्रियाओं तथा SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम-से-कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।
इस रिपोर्ट ने निर्वाचन आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और SIR को लेकर चल रही बहस को और चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और निर्वाचन आयोग के पक्ष को भी देखना महत्वपूर्ण होगा।
जंतर-मंतर पर फिर आंदोलन की चेतावनी
CJP ने कहा है कि यदि उसकी मांग पर 48 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं होती है, तो वह जंतर-मंतर पर फिर से धरना देगा। संगठन का कहना है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर वह आगे भी अपनी आवाज उठाता रहेगा।
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