दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। The Indian Express में प्रकाशित एक खोजी रिपोर्ट के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने दावा किया कि, वह पिछले करीब 3 वर्षों से सबूतों के साथ कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाते रहे हैं और अब चुनाव आयोग के भीतर से भी आपत्तियों की बात सामने आई है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है।
10 महीने में 14 आपत्तियों का दावा
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान The Indian Express की उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कुछ कदमों को लेकर 10 महीने में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई।
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कथित तौर पर मतदाता सूची से जुड़े कदमों, नए मतदाताओं को जोड़ने और नाम हटाने सहित विभिन्न मुद्दों पर आपत्ति जताई। रिपोर्ट में इन आपत्तियों को लेकर ‘अनधिकृत’ और ‘गैरकानूनी’ कदमों पर सवाल उठाए जाने का उल्लेख किया गया है। इन दावों ने चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और निर्वाचन संबंधी पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राहुल गांधी ने दिखाया तीन साल का टाइमलाइन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने एक टाइमलाइन भी पेश की। इसमें उन्होंने फरवरी 2025 से अब तक अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस और कार्यक्रमों के दौरान चुनाव आयोग तथा कथित ‘वोट चोरी’ से जुड़े मुद्दे उठाने का विवरण दिया। उन्होंने कहा कि वे लगातार इस विषय को उठाते रहे हैं और अब चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की कथित आपत्तियों के सामने आने से उनके सवालों को नया संदर्भ मिला है।
एंटी-इनकंबेंसी कहां गायब हो गई?
राहुल गांधी ने चुनावी राजनीति में एंटी-इनकंबेंसी यानी मौजूदा सरकार के खिलाफ मतदाताओं की नाराजगी को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने हरियाणा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले चुनावों में सत्ता परिवर्तन देखने को मिलता था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि चुनावी राजनीति में एंटी-इनकंबेंसी का प्रभाव कम दिखाई दे रहा है।
राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि, बांग्लादेश युद्ध के बाद लोकप्रियता के शिखर पर होने के बावजूद कुछ समय बाद उन्हें भी मजबूत राजनीतिक विरोध और एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ा था। उन्होंने सवाल किया कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी के संदर्भ में एंटी-इनकंबेंसी का प्रभाव वैसा क्यों नहीं दिखाई देता।
वोट सुरक्षित नहीं तो संविधान कैसे बचेगा?
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में वोट को लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि, चुनाव में मतदाता का वोट ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को वैधता देता है और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह वोट की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उनके मुताबिक, अगर वोट की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो इसका असर संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने इसे नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जोड़ते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
CEC ज्ञानेश कुमार पर सीधे सवाल
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के चयन के समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी असहमति का नोट दिया था, इसके बावजूद उनका चयन किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके द्वारा रिपोर्ट के आधार पर किए गए दावों को संबंधित संस्थाओं के आधिकारिक पक्ष और उपलब्ध दस्तावेजों के साथ अलग-अलग देखना जरूरी है।
वोट चोरी के बाद कानून और संस्था चोरी
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि मतदाता का वोट प्रभावित होता है तो उसके बाद बनने वाले कानूनों और संस्थाओं की वैधता को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि, लोकतंत्र में वोट की भूमिका सबसे बुनियादी है और चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी का मुद्दा गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
रिपोर्ट के बाद बढ़ी सियासी हलचल
The Indian Express की रिपोर्ट और राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव, चुनाव आयुक्तों की भूमिका और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
अब नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग इन आरोपों और आपत्तियों पर क्या आधिकारिक जवाब देता है और रिपोर्ट में सामने आए दस्तावेजों को लेकर आगे क्या तथ्य सामने आते हैं।
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