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Fire NOC पर बड़ा सुझाव, अस्पतालों के लिए पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था की मांग, AHPI ने QCI के FGD में उठाए अहम मुद्दे

 Newsbaji  |  Sep 24, 2026 06:52 PM  | 
Last Updated : Sep 24, 2026 06:52 PM
QCI के फोकस ग्रुप डिस्कशन में AHPI छत्तीसगढ़ ने Fire NOC पर रखे महत्वपूर्ण सुझाव
QCI के फोकस ग्रुप डिस्कशन में AHPI छत्तीसगढ़ ने Fire NOC पर रखे महत्वपूर्ण सुझाव

रायपुर। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों के लिए Fire NOC की प्रक्रिया को पारदर्शी, किफायती, समयबद्ध और व्यावहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। रायपुर में Quality Council of India (QCI) द्वारा Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से किए जा रहे Cost of Regulation (CoR) 2.0 Survey के अंतर्गत Fire NOC विषय पर फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) आयोजित किया गया।

इस महत्वपूर्ण चर्चा में Association of Healthcare Providers India (AHPI), छत्तीसगढ़ चैप्टर की ओर से अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता एवं सचिव अतुल सिंघानिया ने सहभागिता की। दोनों ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के दृष्टिकोण से Fire NOC प्रक्रिया से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों और नियामकीय सुधारों की आवश्यकता पर विस्तार से सुझाव प्रस्तुत किए।

सुरक्षा से समझौता नहीं, लेकिन प्रक्रिया हो व्यावहारिक
FGD के दौरान AHPI छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट रूप से यह पक्ष रखा कि अस्पतालों में मरीजों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए अग्नि सुरक्षा के कड़े मानकों को बनाए रखते हुए ऐसी नियामकीय व्यवस्था विकसित किए जाने की आवश्यकता है, जो अस्पतालों के लिए व्यवहारिक भी हो।

AHPI की ओर से सुझाव दिया गया कि Fire NOC की प्रक्रिया में अनावश्यक जटिलताओं को कम करते हुए स्पष्ट नियम, पारदर्शी प्रक्रिया और निर्धारित समय-सीमा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

थर्ड-पार्टी निरीक्षण शुल्क का हो युक्तिसंगत निर्धारण
चर्चा में थर्ड-पार्टी फायर सेफ्टी निरीक्षण से संबंधित शुल्क को युक्तिसंगत और पारदर्शी बनाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। AHPI ने सुझाव दिया कि निरीक्षण शुल्क की ऐसी व्यवस्था हो, जिससे अस्पतालों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और निरीक्षण प्रक्रिया की गुणवत्ता भी बनी रहे।

भवन निर्माण की शुरुआत से ही हो Fire Safety Plan
AHPI ने यह भी सुझाव दिया कि किसी अस्पताल या स्वास्थ्य सेवा भवन के निर्माण की योजना तैयार करते समय ही Fire Safety Plan को मूल भवन योजना का हिस्सा बनाया जाए। इससे भवन के निर्माण के बाद अलग से आवश्यक बदलाव करने की स्थिति कम होगी और शुरुआत से ही अग्नि सुरक्षा के मानकों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।

अस्पतालों का हो Risk-Based Classification
अस्पतालों की प्रकृति, आकार, मरीजों की संख्या, सेवाओं के प्रकार और भवन की संरचना को ध्यान में रखते हुए जोखिम-आधारित वर्गीकरण (Risk-Based Classification) किए जाने का सुझाव भी सामने रखा गया।

AHPI का तर्क रहा कि सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों पर एक समान नियामकीय व्यवस्था लागू करने के बजाय उनके वास्तविक जोखिम और संचालन की प्रकृति के आधार पर आवश्यकताओं का निर्धारण अधिक व्यावहारिक हो सकता है।

फायर फाइटिंग और जल भंडारण मानकों की समीक्षा की जरूरत
बैठक में अग्निशमन व्यवस्था एवं जल भंडारण से जुड़े मौजूदा मानकों की भी व्यावहारिक समीक्षा का सुझाव दिया गया। AHPI ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा मानकों का उद्देश्य प्रभावी अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए और इसके लिए अस्पतालों की वास्तविक जरूरतों तथा उपलब्ध संसाधनों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

Electrical Safety Audit को Fire NOC से जोड़ा जाए
अस्पतालों में आग से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए Electrical Safety Audit को Fire NOC प्रक्रिया के साथ समन्वित करने का सुझाव भी दिया गया। अस्पतालों में विद्युत व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होने के कारण इलेक्ट्रिकल सेफ्टी की नियमित और प्रभावी जांच को अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के साथ जोड़ने से सुरक्षा का व्यापक दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है।

Ease of Doing Business की दिशा में अहम संवाद
रायपुर में आयोजित यह FGD स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र और नियामकीय संस्थाओं के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना। इसमें अस्पतालों के जमीनी अनुभव, संचालन से जुड़ी चुनौतियां और अग्नि सुरक्षा से संबंधित व्यावहारिक आवश्यकताओं को Cost of Regulation 2.0 Survey के संदर्भ में सामने रखा गया।
 

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