राजनांदगांव। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजनांदगांव का गोविन्द राम निर्मलकर ऑडिटोरियम रविवार को आदिवासी अस्मिता, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक चेतना के स्वर से गूंज उठा। कंगला मांझी अंतरराष्ट्रीय समाजवाद सैनिक संगठन द्वारा आयोजित विराट सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य एवं प्रतिनिधि पहुंचे। पूरा ऑडिटोरियम खचाखच भरा रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजमाता फुलवा देवी ने की, जबकि महापौर मधुसूदन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव और बस्तर सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और शिक्षाविदों को मंच से सम्मानित किया गया।
जूडो की गोल्ड मेडलिस्ट रंजीता कोरेटी और कंगला मांझी पर शोध कर रहे शोधार्थी सम्मानित
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जूडो में गोल्ड मेडल हासिल कर देश और समाज का गौरव बढ़ाने वाली रंजीता कोरेटी को स्मृति-चिह्न और मेडल देकर सम्मानित किया गया। इसी क्रम में कंगला मांझी के जीवन, संघर्ष और सामाजिक योगदान पर शोध कार्य कर रहे मीडिया जगत से जुड़े स्कॉलर सुरेन्द्र सिंह को भी स्मृति-चिह्न एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। उनके शोध कार्य को कंगला मांझी की ऐतिहासिक एवं सामाजिक विरासत को दस्तावेजबद्ध करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया गया।
लोकनृत्य ने बांधा समां
कार्यक्रम में बघमार, कोण्डागांव और राजनांदगांव के कंगला मांझी नृत्य दलों ने पारंपरिक लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सभागार में मौजूद लोगों को आदिवासी लोकजीवन और सांस्कृतिक परंपराओं से रूबरू कराया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि आदिवासी समाज की संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान में भी जीवंत और गतिशील सामाजिक पहचान है।
छत्तीसगढ़ की पहचान में आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण योगदान
सम्मेलन में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति, सामाजिक संरचना और लोकजीवन में आदिवासी समाज के योगदान पर विस्तार से विचार रखें। आदिवासी परंपराओं, सामुदायिक जीवन, लोककला, सामाजिक मूल्यों और संघर्षों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
अन्य वक्ताओं ने आदिवासी समाज के ऐतिहासिक संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए कहा कि, समाज की समृद्ध परंपराओं और इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए उनका दस्तावेजीकरण बेहद जरूरी है।
कंगला मांझी के जागरण अभियान और राजमाता फुलवा देवी की संगठन क्षमता की चर्चा
कार्यक्रम में कंगला मांझी के सामाजिक जागरण के कार्यों को विशेष रूप से याद किया गया। वक्ताओं ने उनके विचारों और जनजागरण के प्रयासों को आदिवासी समाज में सामाजिक चेतना और संगठन निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। इस दौरान राजमाता फुलवा देवी की संगठन क्षमता, मांझी सैनिक प्रमुख कुंभ देव कांगे की संगठनात्मक दक्षता और कंगला मांझी की बेटी साहित्यकार राजकुमारी कांगे के लेखन एवं दस्तावेजीकरण के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया।
बघमार को गौरव ग्राम बनाने के प्रयासों को किया याद
कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा ने कंगला मांझी के गांव बघमार को गौरव ग्राम के रूप में विकसित करने और वहां निरंतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के योगदान को याद किया। वहीं, डोंगरगढ़ में सैनिक विश्राम गृह के लिए विराट मंदिर परिसर उपलब्ध कराने में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के योगदान का भी उल्लेख किया गया।
राजनांदगांव के महापौर मधुसूदन यादन ने कहा कि किसी महापुरुष की विरासत को जीवित रखने के लिए केवल स्मरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके जीवन, विचारों, संघर्ष और कार्यों को व्यवस्थित रूप से संरक्षित और दस्तावेजबद्ध किया जाना भी जरूरी है। साथ ही कंगला मांझी संगठन को राजनांदगांव शहर में समाज के भवन के लिए सुविधियुक्त जमीन देने की घोषणा मंच से की।
नई दिल्ली के बाद राजनांदगांव में बड़ा आयोजन
उल्लेखनीय है कि, पिछले वर्ष नई दिल्ली में विश्व आदिवासी दिवस सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसके बाद इस वर्ष राजनांदगांव में कंगला मांझी अंतरराष्ट्रीय समाजवाद सैनिक संगठन ने व्यापक स्तर पर सम्मेलन आयोजित कर आदिवासी समाज की संस्कृति, इतिहास और सामाजिक योगदान को एक बड़े मंच पर सामने रखा।
सम्मेलन में मोहन हिडको, दिनेश कोरेटी और भुनेश्वर नेताम अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भिलाई से यमुनोत्री वर्मा, स्मिता वर्मा तथा अगास दिया के कोषाध्यक्ष नीतीश सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
राजकुमारी कांगे ने संभाली मंच की कमान
कार्यक्रम का सफल संचालन साहित्यकार राजकुमारी कांगे ने किया। सम्मेलन को सफल बनाने में मांझी सैनिक प्रमुख कुंभ देव कांगे और संगठन के सचिव राजीव उइके सहित संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। करीब 5 घंटे चले इस सम्मेलन में सम्मान, संस्कृति और विचार-विमर्श का संगम देखने को मिला। दोपहर 4 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम रात 9 बजे तक चला।
राजनांदगांव में आयोजित यह सम्मेलन आदिवासी समाज की अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकजुटता और ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बनकर सामने आया।
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