रायपुर/जशपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिले के पत्थलगांव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बटूराबहार (हर्रापारा) में डोम समाज के लोगों को सार्वजनिक बोर से पानी लेने से रोकने और जातिसूचक अपमान किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले के विरोध में सामाजिक न्याय अधिकार कार्यकर्ताओं एवं अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि, पीड़ित परिवारों को सार्वजनिक जलस्रोतों के उपयोग से वंचित करना न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि संविधान की मूल भावना पर भी सीधा प्रहार है। प्रतिनिधिमंडल ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा पीड़ित परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग उठाई है।
मूलभूत सुविधाओं से वंचित करना गलत
अधिवक्ता भगवानू नायक ने कहा कि, पीने का पानी हर नागरिक का मूलभूत अधिकार है। यदि आज भी किसी समाज विशेष के लोगों को जाति के आधार पर सार्वजनिक बोर से पानी लेने से रोका जा रहा है, तो यह बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
उन्होंने कहा कि, देश को आजाद हुए 75 वर्ष से अधिक हो चुके हैं, इसके बावजूद समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को जातिगत भेदभाव झेलना पड़ रहा है। सार्वजनिक बोर, तालाब और अन्य जलस्रोतों पर सभी नागरिकों का समान अधिकार है और किसी को भी जाति के नाम पर अपमानित करना गंभीर अपराध है।
आगे आंदोलन होगा उग्र
अधिवक्ता आनंद मुंगरी ने कहा कि, हम AI और आधुनिक तकनीक के दौर में जी रहे हैं, लेकिन यदि समाज में आज भी जातिवाद जैसी संकीर्ण मानसिकता मौजूद है, तो यह देश और समाज के विकास के लिए गंभीर खतरा है। इस मामले को लेकर सामाजिक संगठनों और अधिकार कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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