रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट नर्सेस रजिस्ट्रेशन कौंसिल (CGSNRC) द्वारा नर्सिंग महाविद्यालयों के वार्षिक निरीक्षण के लिए जारी प्रक्रिया को लेकर प्रक्रियागत विसंगतियों, निरीक्षण दलों के गठन, अल्प सूचना में कार्यक्रम जारी करने, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में चिकित्सा प्रकोष्ठ, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने उच्चस्तरीय जांच और आवश्यक सुधार की मांग की है।
डॉ. गुप्ता की ओर से उठाए गए मुद्दों के अनुसार, 17 अगस्त 2026 से प्रस्तावित निरीक्षण कार्यक्रम की सूचना कई नर्सिंग महाविद्यालयों को 15 अगस्त की शाम, यानी सार्वजनिक अवकाश के दिन, ई-मेल के माध्यम से प्राप्त हुई। उनका कहना है कि, इतने कम समय में निरीक्षण दल के सदस्यों के लिए यात्रा की व्यवस्था करना कठिन है। कई सदस्यों को लगभग 300 किमी तक की यात्रा करनी पड़ रही है, जिससे तत्काल रेल आरक्षण उपलब्ध न होने की स्थिति में सड़क मार्ग से यात्रा करने पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।
निरीक्षण दलों के गठन पर भी सवाल
शिकायत में निरीक्षण दलों के गठन और सदस्यों की सूची को लेकर भी विसंगतियों का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि, कुछ नामित डॉक्टरों ने निरीक्षण में जाने में असमर्थता या अनिच्छा व्यक्त की है, जबकि कुछ मामलों में सेवानिवृत्त डॉक्टरों के नाम भी सूची में शामिल होने की बात सामने आई है। निरीक्षकों के नाम अथवा पदनाम में त्रुटि तथा सदस्यों की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना निरीक्षण कार्यक्रम निर्धारित किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
डॉक्टर की मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग
निरीक्षण दल में डॉक्टर अथवा संबंधित फैकल्टी सदस्य की भूमिका को लेकर भी स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार, कुछ सदस्यों की अनुपलब्धता की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में स्पष्ट लिखित आदेश के बजाय मौखिक निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।
डॉ. गुप्ता ने मांग की है कि, यदि निर्धारित निरीक्षण प्रक्रिया में डॉक्टर की उपस्थिति अनिवार्य है, तो इसकी स्पष्ट पुष्टि की जाए और निर्धारित संरचना के अनुरूप ही निरीक्षण दल भेजे जाएं, ताकि निरीक्षण की विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे।
ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी क्षमता पर भी सवाल
निरीक्षण प्रक्रिया को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ने के बावजूद उसकी व्यावहारिकता को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं। शिकायत में कहा गया है कि पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेज, सूचनाएं और निरीक्षण विवरण एक ही दिन में पूरा करना कई परिस्थितियों में व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है।
इसके अलावा सर्वर संबंधी समस्या, दस्तावेज अपलोड न होने या अन्य तकनीकी बाधा आने की स्थिति में निरीक्षण दल को जिम्मेदार नहीं ठहराए जाने की मांग की गई है। निरीक्षकों को समय से पहले User ID, Password, तकनीकी प्रशिक्षण और लिखित दिशा-निर्देश उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई गई है।
कौंसिल के अधिकारियों की निरीक्षण में भागीदारी पर उठे सवाल
शिकायत में CGSNRC के रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के निरीक्षण कार्य में शामिल होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि निरीक्षण प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका और उनकी स्वतंत्रता का परीक्षण किया जाना चाहिए तथा संभावित हित-संघर्ष (Conflict of Interest) को समाप्त करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
व्यवहार और संवाद को लेकर भी शिकायत
निरीक्षण संबंधी जानकारी अथवा स्पष्टीकरण के लिए कौंसिल के अधिकारियों से संपर्क करने वाले डॉक्टरों और फैकल्टी सदस्यों के साथ कथित तौर पर अशिष्ट अथवा अनप्रोफेशनल व्यवहार किए जाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि, नियामक संस्था से जुड़े अधिकारियों द्वारा नर्सिंग महाविद्यालयों, डॉक्टरों और शिक्षकों के साथ सम्मानजनक एवं पेशेवर संवाद किया जाना चाहिए तथा इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
निरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
इन सभी मुद्दों के बीच निरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। शिकायत में निरीक्षण आवंटन में संभावित पक्षपात अथवा हित-संघर्ष की आशंका को समाप्त करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। डॉ. राकेश गुप्ता ने मांग की है कि, 17 अगस्त 2026 से प्रस्तावित निरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल स्थगित कर पहले सभी प्रक्रियागत कमियों को दूर किया जाए और इसके बाद संशोधित एवं व्यवस्थित कार्यक्रम के तहत निरीक्षण शुरू किया जाए।
इसके साथ ही निरीक्षण दलों के सदस्यों की योग्यता, पद, सेवा स्थिति और निरीक्षण के लिए पात्रता का सत्यापन कराने, दूरस्थ क्षेत्रों में भेजे जाने वाले दलों के लिए यात्रा एवं ठहरने की उचित व्यवस्था करने तथा नियमानुसार अग्रिम TA/DA उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
ऑनलाइन निरीक्षण पोर्टल की तकनीकी क्षमता की स्वतंत्र समीक्षा, पर्याप्त समय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने तथा कौंसिल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निरीक्षण दलों में शामिल न करने की मांग भी की गई है।
स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग
मामले में उठाए गए सवालों को देखते हुए निरीक्षण आवंटन, दलों के गठन, ऑनलाइन प्रक्रिया और अफसरों की भूमिका की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए निरीक्षण संबंधी सभी निर्णयों एवं निर्देशों को केवल आधिकारिक लिखित माध्यम से जारी करने की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
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