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32000 रुपए का एक स्टील जग, 51 लाख की हो गई खरीदी! शासकीय विभाग बोला- नहीं हुई कोई खरीदी

 Newsbaji  |  Jul 16, 2025 09:23 AM  | 
Last Updated : Jul 16, 2025 09:43 AM
प्रदेश में जग पर जंग जारी
प्रदेश में जग पर जंग जारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में एक अनोखा मामला सामने आया है। दरअसल, बलौदाबाजार जिले के आदिवासी छात्रावास में 32,000 रुपए में प्रति स्टील पानी जग की कथित खरीदी को लेकर उठा विवाद थम नहीं रहा है। कुछ दिन पहले पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने यह मुद्दा सोशल मीडिया पर उठाते हुए दावा किया था कि छात्रावासों में 160 जग खरीदे गए, जिन पर 51 लाख रुपए का बिल बना है।

वहीं, संबंधित आदिवासी विभाग की ओर से आए जवाब में स्पष्ट किया गया कि फरवरी 2025 में तत्कालीन सहायक आयुक्त संजय कुर्रे द्वारा 160 स्टील जग की खरीदी का प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन प्रस्ताव में दी गई दर अधिक होने के कारण इसे उसी समय निरस्त कर दिया गया था। वर्तमान सहायक आयुक्त सूरजदास मानिकपुरी ने बताया कि प्रस्ताव के बाद न तो ऑर्डर जारी हुआ, न ही किसी प्रकार की सप्लाई या भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। विभाग ने कहा कि वायरल हो रहा तथाकथित बिल संभवतः इसी निरस्त प्रस्ताव से संबंधित है, जिसे अनुमोदन नहीं मिला था।

विपक्षी दल कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर राज्य सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि, एक स्टील जग की कीमत 32 हजार रुपए रखी गई, जो कोई वर्ल्ड कप ट्रॉफी नहीं है।

160 स्टील जग की खरीद के लिए 51 लाख रुपए का वार्कऑर्डर देना बेशर्मी है और आदिवासी बच्चों के फंड को भी नहीं बख्शा गया। कांग्रेस ने कथित दस्तावेजों के आधार पर सरकार पर हमला बोला और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। 

संबंधी भ्रामक पोस्ट का तथ्यात्मक खंडन- देवलाल ठाकुर

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कांग्रेस के झूठ पर तथ्यात्मक वार करते हुए कहा कि, बलौदाबाजार जिले के आदिवासी विकास विभाग द्वारा छात्रावास हेतु वाटर जग की जो खरीदी प्रस्तावित थी, उसे 23 फरवरी 2025 को ही जेम पोर्टल पर निरस्त कर दिया गया है। 32,499.50 रुपए प्रति जग की दर से 160 नग की कुल संभावित राशि 51 लाख रुपए की कोई भी भुगतान या आपूर्ति नहीं हुई है। जेम पोर्टल पर उत्पाद चयन एक प्रारंभिक प्रक्रिया है। इसके बाद मूल्य और गुणवत्ता का मूल्यांकन, अनुमोदन और अंतिम स्वीकृति की बहुस्तरीय प्रक्रिया होती है, जिसमें यह प्रस्ताव रद्द कर दिया गया। बिना पूरी जानकारी के एक प्रस्तावित (और रद्द हो चुकी) खरीदी को आधार बनाकर झूठे दावे करना, जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है और निंदनीय है।

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