लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज बड़ा दिन माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार रविवार दोपहर 3:30 बजे करने जा रहे हैं। राजभवन में होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक इस विस्तार में 6 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी संभव है।
भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर खास फोकस किया है। पार्टी ब्राह्मण, जाट, ओबीसी, दलित और महिला वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति के तहत नए चेहरों को मौका देने जा रही है।
इन चेहरों पर सबसे ज्यादा चर्चा
सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा के करीब आए ब्राह्मण नेता मनोज पांडेय को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। वहीं पश्चिमी यूपी और जाट समाज को साधने के लिए भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम भी है।
इसके अलावा
हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि कई नेताओं को फोन कर राजभवन पहुंचने का संदेश दे दिया गया है।
क्यों अहम है यह कैबिनेट विस्तार?
लोकसभा चुनाव के बाद यूपी सरकार में कई पद खाली हुए थे। कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद और राज्यमंत्री अनूप प्रधान वाल्मीकि सांसद बन चुके हैं। फिलहाल योगी मंत्रिमंडल में कुल 54 सदस्य हैं, जबकि नियमों के अनुसार यूपी में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में 6 नए मंत्रियों की नियुक्ति होनी है।
भाजपा का मिशन 2027
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का बड़ा संकेत है। भाजपा सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के जरिए विपक्ष को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है।
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