बस्तर। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह 9 मई को दो दिवसीय दौरे पर Bastar पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे Jagdalpur में आयोजित होने वाली एक अहम अंतर-राज्यीय समन्वय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस हाईप्रोफाइल बैठक में नक्सलवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति, सीमावर्ती राज्यों के समन्वय और बस्तर क्षेत्र के विकास को लेकर बड़ा मंथन होगा।
केंद्र सरकार के “31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त बनाने” के लक्ष्य के बाद यह पहली बड़ी रणनीतिक बैठक मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में Chhattisgarh सहित Madhya Pradesh, Uttar Pradesh और Uttarakhand के मुख्यमंत्री, वरिष्ठ मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हो सकते हैं। अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों के प्रतिनिधियों के भी जुड़ने की संभावना जताई जा रही है।
सुरक्षा और विकास दोनों एजेंडे पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य फोकस नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद की सुरक्षा व्यवस्था, अंतर-राज्यीय ऑपरेशन, खुफिया समन्वय और विकास योजनाओं की समीक्षा रहेगा। खास तौर पर सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरस्थ इलाकों तक प्रशासनिक पहुंच मजबूत करने को लेकर चर्चा होगी।
बताया जा रहा है कि, केंद्रीय गृहमंत्री सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अलग से बैठक कर बस्तर में आगे की रणनीति पर भी चर्चा करेंगे। हाल के महीनों में सुरक्षा बलों को मिली सफलता के बाद केंद्र सरकार अब “डेवलपमेंट मॉडल” को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
18 मई की रात जगदलपुर पहुंचेंगे शाह
जानकारी के अनुसार, अमित शाह 18 मई की रात सीधे जगदलपुर पहुंचेंगे और रात्रि विश्राम करेंगे। 19 मई को दिनभर बैठकों और समीक्षा कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद वे शाम को दिल्ली लौट जाएंगे।
इससे पहले ऐसी अंतर-राज्यीय समन्वय बैठक Lucknow में आयोजित हुई थी। अब बस्तर में हो रही यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इसे नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक चरण की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रशासन ने तेज की तैयारियां
बैठक को लेकर राज्य सरकार और प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मुख्य सचिव विकासशील ने सभी विभागों से पिछली बैठक के निर्णयों के आधार पर प्रगति रिपोर्ट और लंबित मामलों का ब्योरा मांगा है। माना जा रहा है कि बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर किए गए कार्यों का विस्तृत प्रेजेंटेशन भी दिया जाएगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बस्तर में होने वाली यह बैठक आने वाले समय में केंद्र और राज्यों की संयुक्त रणनीति की दिशा तय कर सकती है।
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