रायपुर। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) ने राज्य में कार्यरत विदेशी चिकित्सा स्नातकों (FMGs) से जुड़े मुद्दों को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। फेडरेशन ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा 18 मार्च 2026 को जारी दिशानिर्देशों के सही क्रियान्वयन की मांग करते हुए वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
CGDF ने अपने पत्र में कहा है कि, NMC द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य के कुछ मेडिकल संस्थानों में इनका पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे FMGs को अनावश्यक प्रशासनिक, शैक्षणिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
फेडरेशन के अनुसार, NMC के नए दिशानिर्देशों में कोविड या अन्य विशेष परिस्थितियों में ऑनलाइन अथवा हाइब्रिड माध्यम से पढ़ाई करने वाले FMGs को अतिरिक्त प्रशिक्षण के जरिए पात्र माना गया है। साथ ही, अलग से इंटर्नशिप बढ़ाने को अनिवार्य नहीं बताया गया है और विश्वविद्यालयों द्वारा जारी Compensation Letter को भी मान्यता दी गई है।
इसके बावजूद, CGDF का आरोप है कि राज्य चिकित्सा परिषद द्वारा इन दिशा-निर्देशों के विपरीत अतिरिक्त नियम लागू किए जा रहे हैं। इससे न केवल अभ्यर्थियों के साथ असमानता हो रही है, बल्कि FMG परीक्षा पास करने के बाद भी उन्हें अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है।

फेडरेशन ने राज्य सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं-
CGDF ने स्पष्ट किया कि, यह मुद्दा हजारों FMGs के भविष्य और करियर से जुड़ा है, इसलिए इस पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है। फेडरेशन ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द उचित कदम उठाएगी।
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