महराजगंज। बच्चों की शिक्षा और उनकी सुरक्षा के बीच खड़े एक फैसले ने महराजगंज के सदर ब्लॉक क्षेत्र में ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ा दिया है। ग्राम सभा कोदइला स्थित प्राथमिक विद्यालय का भिस्वा के प्राथमिक विद्यालय में विलय किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। हाथों में बैनर और जुबान पर ‘स्कूल नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लिए ग्रामीणों ने प्रशासन से विद्यालय को पूर्व की तरह संचालित करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि, विद्यालय के विलय के बाद गांव के छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए NH-730 पार करके भिस्वा स्थित प्राथमिक विद्यालय जाना पड़ रहा है। व्यस्त हाईवे पर वाहनों की तेज आवाजाही के बीच बच्चों का सड़क पार करना अभिभावकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा जरूरी है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा से समझौता करके नहीं।
‘बच्चे स्कूल जाएं या हादसे का डर लेकर घर से निकलें?’
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब प्राथमिक स्तर के बच्चों की उम्र ही ऐसी है कि उन्हें सुरक्षित वातावरण और अभिभावकीय निगरानी की जरूरत होती है, तो उन्हें व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर दूसरे गांव के विद्यालय भेजना कितना सुरक्षित है?
अभिभावकों के मुताबिक, NH-730 पर लगातार वाहनों का आवागमन रहता है। ऐसे में छोटे बच्चों द्वारा अकेले या समूह में हाईवे पार करना दुर्घटना का कारण बन सकता है। यही वजह है कि कुछ अभिभावक बच्चों को दूर स्थित विद्यालय भेजने को लेकर भी चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय गांव में ही संचालित होता रहे तो बच्चों को सुरक्षित और आसानी से शिक्षा मिल सकती है। वहीं विद्यालय विलय के बाद दूरी और हाईवे का जोखिम बच्चों की नियमित पढ़ाई में भी बाधा बन सकता है।
विलय के मानकों को लेकर ग्रामीणों ने उठाया बड़ा सवाल
विद्यालय विलय के विरोध में ग्रामीणों ने 2 अगस्त 2025 को बेसिक शिक्षा मंत्री के हवाले से प्रकाशित खबरों का भी हवाला दिया। ग्रामीणों के अनुसार, उस समय विद्यालय विलय को लेकर ऐसे मानकों की चर्चा हुई थी, जिनमें बच्चों के विद्यालय तक पहुंचने के रास्ते की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण माना गया था। ग्रामीणों का दावा है कि ऐसे विद्यालयों के विलय पर पुनर्विचार की बात कही गई थी, जहां बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए हाईवे, ताल-तलैया या पोखर जैसे जोखिम वाले स्थानों से होकर गुजरना पड़ता है।
इसी आधार पर ग्रामीणों का सवाल है कि यदि बच्चों की सुरक्षा को विद्यालय विलय के निर्णय में महत्वपूर्ण मानक माना गया है, तो कोदइला प्राथमिक विद्यालय के मामले में एनएच-730 पार करने की स्थिति पर विचार क्यों नहीं किया गया?
ग्रामीणों की दो टूक- ‘बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कुछ नहीं’
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि वे शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित शिक्षा दिलाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांव में पहले से मौजूद विद्यालय को बंद या दूसरे विद्यालय में विलय करने के बजाय बच्चों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि, कोदइला प्राथमिक विद्यालय के विलय के फैसले की दोबारा समीक्षा की जाए और विद्यालय को पूर्व की तरह संचालित किया जाए।
बैनर लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण
विद्यालय विलय के विरोध में ग्रामीणों ने बैनर के साथ प्रदर्शन किया। इस दौरान ‘स्कूल नहीं तो वोट नहीं’ का नारा गूंजा। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि विद्यालय का विलय वापस नहीं लिया गया तो उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
अब पूरे मामले में नजर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के अगले कदम पर है। सवाल सिर्फ एक विद्यालय के संचालन का नहीं, बल्कि उन छोटे बच्चों की सुरक्षा का भी है, जिन्हें रोजाना शिक्षा के लिए व्यस्त एनएच-730 पार करना पड़ेगा।
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