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नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही बीजेपी में बगावत, जिलाध्यक्ष समेत पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा

 Newsbaji  |  Jul 11, 2026 08:48 AM  | 
Last Updated : Jul 11, 2026 08:48 AM
दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर बीजेपी में बगावत, जिलाध्यक्ष का सामूहिक इस्तीफा
दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर बीजेपी में बगावत, जिलाध्यक्ष का सामूहिक इस्तीफा

दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। पार्टी द्वारा पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर युवा नेता आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद संगठन में खुली नाराजगी देखने को मिल रही है। इस फैसले के विरोध में भाजपा के दतिया जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा ने कई पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ सामूहिक इस्तीफे का ऐलान कर दिया है।

केन्द्रीय अध्यक्ष को लिखा पत्र
रघुवीर सिंह कुशवाहा ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और वरिष्ठ नेता हेमंत खंडेलवाल के नाम पत्र लिखकर पार्टी के निर्णय को एकतरफा और कार्यकर्ताओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है कि दतिया उपचुनाव में पार्टी का उम्मीदवार बदलने का निर्णय स्थानीय संगठन की उपेक्षा करते हुए लिया गया है।

अपने पत्र में उन्होंने बताया कि उनके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, बड़ौनी पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दतिया विधानसभा के छह मंडलों के अध्यक्ष, विभिन्न मोर्चों के अध्यक्ष, पार्षदगण तथा 291 बूथ अध्यक्ष एवं उनकी कार्यकारिणी ने भी अपने-अपने दायित्वों से सामूहिक इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।

24 घंटे का अल्टीमेटम
रघुवीर सिंह कुशवाहा ने पार्टी नेतृत्व को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को दोबारा उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया, तो वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देंगे और फैसले का खुलकर विरोध करेंगे।

सड़क पर उतरे समर्थक
इधर, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने भी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ नारेबाजी की। इस घटनाक्रम के बाद दतिया भाजपा में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, उपचुनाव से ठीक पहले सामने आई यह नाराजगी भाजपा के लिए चुनौती बन सकती है। पार्टी के सामने अब कांग्रेस से मुकाबले के साथ-साथ संगठन के भीतर असंतोष को शांत करना भी बड़ी परीक्षा होगी। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा नेतृत्व अपने फैसले पर कायम रहता है या डॉ. नरोत्तम मिश्रा को दोबारा मैदान में उतारने पर विचार करता है।

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