बांकीपुर/दतिया। देश के दो अहम राज्यों बिहार और मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। बिहार की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर भाजपा के तीन दशक पुराने अभेद्य किले को ढहा दिया। वहीं मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6000 से अधिक मतों से पराजित कर कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाई।
बांकीपुर में 31 साल बाद टूटा भाजपा का गढ़
बिहार की बांकीपुर सीट भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। नितिन नवीन लगातार 5 बार विधायक रहे, जबकि उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भी पटना पश्चिम सीट से लगातार चार बार विधायक चुने गए थे। इस तरह 31 वर्षों और लगातार 9 चुनावों तक भाजपा का दबदबा कायम रहा, जिसे इस उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने समाप्त कर दिया।
जन सुराज का खुला खाता
यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। अब पार्टी ने पहली बार विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
दतिया में कांग्रेस की दमदार वापसी
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6000 से अधिक वोटों से हरा दिया। शुरुआती रुझानों में भाजपा आगे थी, लेकिन मतगणना पूरी होने तक कांग्रेस ने निर्णायक बढ़त बना ली।
घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर
कुंवर घनश्याम सिंह ने एक बार फिर से विधायक बन गए हैं। इनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव रहा है।घनश्याम सिंह ने सन 1993 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर दतिया सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा का सफर तय किया था।उसके बाद उन्होंने 1998 में भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना करना पड़ा। वहीं उन्होंने 1998 में हार के बाद 2003 में दतिया विधानसभा सीट से जोरदार वापसी की और दोबार विधायक बन गए।
हालांकि, इस जीत से मध्य प्रदेश की सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसे भाजपा के लिए राजनीतिक चेतावनी और कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाली सफलता माना जा रहा है।
कांग्रेस की अंदरूनी कलह भी रही चर्चा में
दतिया उपचुनाव के दौरान कांग्रेस की आंतरिक खींचतान भी सुर्खियों में रही। पार्टी ने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त कर दी थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया और दावा किया कि 2028 के विधानसभा चुनाव में वे अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करेंगे।
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