रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के प्रमोटर और मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है। ओमान से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उसे दिल्ली की अदालत में पेश किया। CBI ने सौरभ चंद्राकर की ट्रांजिट रिमांड की मांग की थी, जिसे अदालत ने मंजूरी दे दी।
दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद अब CBI की टीम सौरभ चंद्राकर को रायपुर लेकर आएगी। यहां उससे महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के नेटवर्क, अवैध लेनदेन और सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ की जाएगी।
1 नवंबर को ओमान से भारत लाया गया सौरभ
गौरतलब है कि महादेव ऑनलाइन बुक सिंडिकेट के प्रमोटर और प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर 2026 को ओमान से भारत प्रत्यर्पित कराया गया था। CBI ने अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर इस कार्रवाई को अंजाम दिया। सौरभ के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इसी आधार पर उसकी लोकेशन का पता लगाया गया और रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। इसके बाद भारत सरकार ने ओमान सरकार के साथ प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी की।
दो CBI मामलों में आरोपपत्र, ED भी कर चुकी है कार्रवाई
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ CBI के दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी एक मामले में उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है। ईडी की जांच के दौरान भारत और विदेशों में स्थित उसकी कई संपत्तियों को अटैच किया गया है।
देशभर में फैला था अवैध सट्टेबाजी का नेटवर्क
छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर CBI ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था, जिसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था।
इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी आधारित पैनल और शाखाओं का नेटवर्क तैयार किया गया था। इन पैनलों के जरिए लोगों को सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे रकम वसूली जाती थी।
म्यूल बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी रकम
जांच में यह भी सामने आया कि कथित अवैध सट्टेबाजी से अर्जित रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए अलग-अलग लेनदेन में घुमाया जाता था। इसके बाद हवाला नेटवर्क के माध्यम से रकम विदेश भेजे जाने का आरोप है।
CBI के मुताबिक, इस सिंडिकेट को बिना किसी बाधा के संचालित करने के लिए अवैध कमाई का एक हिस्सा कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण राशि के रूप में भी दिया जाता था।
भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत कार्रवाई
CBI ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं। सौरभ चंद्राकर इन मामलों में नामजद प्रमुख आरोपियों में शामिल है।
रायपुर में पूछताछ से खुल सकते हैं कई राज
अब CBI सौरभ चंद्राकर को रायपुर लाकर उससे पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी का फोकस महादेव सट्टा ऐप के संचालन, आर्थिक लेनदेन, हवाला नेटवर्क, फ्रेंचाइजी पैनलों और कथित संरक्षण देने वालों की भूमिका से जुड़े पहलुओं पर हो सकता है।
सौरभ से पूछताछ के दौरान सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों और उसकी गतिविधियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है। इस मामले में आगे की जांच और पूछताछ पर सभी की नजरें रहेंगी।
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