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कबरा हाथी का खूनी आतंक: 6 महीने में 14 लोगों की मौत, अखोरा में चाचा-भतीजे पर हमला, दो ग्रामीणों को कुचलकर मार डाला

 Newsbaji  |  Nov 02, 2026 07:45 AM  | 
Last Updated : Nov 02, 2026 07:45 AM
कबरा हाथी का खूनी आतंक, छह महीने में 14 लोगों की मौत, अखोरा में दो ग्रामीणों को कुचला
कबरा हाथी का खूनी आतंक, छह महीने में 14 लोगों की मौत, अखोरा में दो ग्रामीणों को कुचला

सूरजपुर/बलरामपुर। सरगुजा संभाग में एक कबरा हाथी का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। अकेले विचरण कर रहे इस हाथी ने अब तक कई लोगों की जान ले ली है। ताजा घटना में सूरजपुर और बलरामपुर जिले की सीमा पर स्थित अखोरा गांव में हाथी ने दो लोगों को कुचलकर मार डाला। पिछले 6 महीनों के भीतर इस हाथी के हमले में 14 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। 

बाइक सवार चाचा-भतीजे पर अचानक हमला, एक की मौके पर मौत
जानकारी के अनुसार, सूरजपुर जिले के कल्याणपुर और अखोरा गांव के बीच फुलझर नदी के पास सड़क पर बाइक से जा रहे दो लोगों पर हाथी ने अचानक हमला कर दिया। हाथी के हमले में बाइक सवार विश्वनाथ की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दूसरे युवक बलदेव ने पीछे से आ रहे एक ट्रक के नीचे छिपकर किसी तरह अपनी जान बचाई। हाथी को सामने देखकर ट्रक चालक ने भी वाहन रोक दिया था, जिससे बलदेव को छिपने का मौका मिल गया।

बताया जा रहा है कि, दोनों रिश्ते में चाचा-भतीजा थे और बाइक से अपने घर लौट रहे थे। विश्वनाथ बलरामपुर जिले के राजपुर क्षेत्र के ग्राम बाटीडांड स्थित पहाड़ी कोरवा आश्रम में कर्मचारी था। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी।

खेत में घास काटने गया ग्रामीण भी बना हाथी का शिकार
पहली घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल था। इसी बीच पता चला कि अखोरा निवासी मानदेव यादव घास काटने के लिए खेत गया था, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटा। अनहोनी की आशंका में परिजन और वन विभाग के कर्मचारी उसकी तलाश में खेत पहुंचे। वहां मानदेव का शव मिला। हाथी ने उसे भी कुचलकर मौत के घाट उतार दिया था।
एक ही दिन में दो लोगों की मौत से इलाके में मातम और गुस्से का माहौल है।

अकेले घूमता है हाथी, कई गांवों में फैला चुका है दहशत
वन विभाग के कर्मचारी लगातार इस हाथी की निगरानी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह हाथी झुंड से अलग रहता है और अकेले ही विचरण करता है। वर्तमान में इसके बलरामपुर जिले के बदौली इलाके में होने की जानकारी है।

इससे पहले भी यह हाथी कई लोगों की जान ले चुका है। बलरामपुर जिले के राजपुर क्षेत्र के ग्राम परसवार में एक व्यक्ति को उसके घर के पास कुचलकर मार डाला था। वहीं सूरजपुर जिले के दरहोरा गांव में भी एक युवक को खेत में हाथी ने कुचल दिया था। लगातार बदलते ठिकानों और अप्रत्याशित हमलों के कारण ग्रामीणों में भय बना हुआ है। लोग खेतों में जाने और रात में घर से बाहर निकलने तक से डरने लगे हैं।

हाथी को पकड़ने की फाइल आगे नहीं बढ़ी, आखिर कब होगा फैसला?
सबसे बड़ा सवाल वन विभाग की कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। जानकारी के मुताबिक, इस हिंसक हाथी को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने के लिए वन विभाग के अधिकारियों ने अपने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है, लेकिन अब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।

कुछ दिन पहले वन मंत्री केदार कश्यप ने भी कहा था कि हाथी को पकड़ने की प्रक्रिया के लिए कागजी कार्रवाई चल रही है। लेकिन इस कार्रवाई की धीमी रफ्तार के बीच हाथी के हमले लगातार जारी हैं और लोगों की जान जा रही है।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते हाथी को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने की कार्रवाई की गई होती तो शायद इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान नहीं जाती।

14 मौतों के बाद भी इंतजार क्यों?
छह महीने में 14 लोगों की मौत कोई सामान्य घटना नहीं है। यह मानव-हाथी संघर्ष की भयावह स्थिति और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। वन विभाग की निगरानी के बावजूद यदि हाथी लगातार लोगों को निशाना बना रहा है, तो केवल निगरानी से समस्या का समाधान कैसे होगा?

अब सवाल यह है कि क्या शासन और वन विभाग किसी ठोस निर्णय पर पहुंचेंगे? क्या हाथी को पकड़ने की अनुमति और जरूरी संसाधन समय रहते उपलब्ध कराए जाएंगे? या फिर कागजी कार्रवाई पूरी होने के इंतजार में ग्रामीणों की जान जाती रहेगी?
 

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