मनेंद्रगढ़. जिले के केल्हारी फारेस्ट रेंज में गुंडरू नदी में मछली मारने गए मछुआरे पर बाघ ने हमला कर दिया। फिर उसके शरीर को आधा खाकर छोड़ दिया था। शनिवार की सुबह उसकी लाश बरामद की गई। इसके साथ पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। इंसानी मांस का स्वाद चखने के बाद बाघ के आदमखोर हो जाने का खतरा भी मंडरा रहा है। ऐसे में वन विभाग के अफसरो ने पूरे इलाके के लोगों को अलर्ट कर दिया है और जंगल जाने से मना कर दिया है।
मनेंद्रगढ़—भरतपुर—सोनहत जिले का बड़ा इलाका घने जंगल से घिरा है। यहां तेंदुआ और बाघ जैसे कई खतरनाक जंगली जानवर पाए जाते हैं। पिछले दिनों एक तेंदुए ने आतंक मचाते हुए चार लोगों को मार डाला था। उसके पकड़े जाने के बाद लोग राहत की सांस ले रहे थे। लेकिन, शुक्रवार की सुबह डर वापस आ गया, क्योंकि वन विभाग की टीम को सर्चिंग के दौरान केल्हारी वन परिक्षेत्र में बाघ के पंजों के निशान मिले थे। तब भी उन्होंने आसपास के गांववालों तक सूचना पहुंचाकर जंगल में जाने से मना किया था।
इसके बाद भी कछौड़ ग्राम पंचायत के गूंडरुपारा गांव के बुधलाल अगरिया और पंचू शुक्रवार की शाम गुंडरू नदी मछली मारने चले गए। दोनों नदी किनारे अलग—अलग जगह पर जाल लगाकर मछली पकड़ रहे थे। शाम होने पर पंचू बुधलाल के पास पहुंचा तो हैरान रह गया। मौके पर जाल अस्त—व्यस्त पड़ा और मौके पर खून दिखा। पास जाकर देखा तो उसे बुधलाल के पैर का पंजा नजर आया, जिसे देखते ही डर के मारे उसका बुरा हाल हो गया। भागते—पड़ते वह गांव पहुंचा और गांववालों को पूरा माजरा कह सुनाया। लेकिन, तब तक रात हो गई थी। वन विभाग को भी इसकी सूचना पहुंचाई गई। तब वन अफसरों ने भी गांववालों को रात में जंगल जाने से मना कर दिया।
आधे शरीर को खाकर छोड़ा
शनिवार की सुबह गांववाले वन विभाग के अधिकारी—कर्मचारियों और पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। फिर आसपास तलाशी ली गई। तब उन्हें बुधलाल का आधा शरीर क्षत—विक्षत हालत में मिला। यानी बाघ ने उसके आधे शरीर को खा लिया था। पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है। इसके साथ ही वन विभाग ने पूरे इलाके में अलर्ट कर दिया है और अब किसी को भी जंगल में जाने से मना किया गया है।
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