कबीरधाम। जिले के सुदूर वनांचल में मलेरिया का प्रकोप एक बार फिर गंभीर होता नजर आ रहा है। बोड़ला विकासखंड के 6 गांवों में पिछले दो सप्ताह से तेज बुखार का कहर जारी था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग तब सक्रिय हुआ जब मुड़वाही गांव में एक 12 वर्षीय बच्चे समेत 3 लोगों की संदिग्ध मौत की सूचना जिला मुख्यालय पहुंची। इसके बाद लगाए गए विशेष स्वास्थ्य शिविरों में महज तीन दिनों की जांच में 50 से अधिक ग्रामीण मलेरिया संक्रमित पाए गए।
ग्रामीणों का आरोप
जानकारी के मुताबिक, मुड़वाही, जामुनपानी, सोनवाही, सरेण्डा, समनापुर और बहनाखोदरा गांवों में पिछले 12 से 15 दिनों से बड़ी संख्या में लोग बुखार से पीड़ित थे। ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते न तो स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और न ही जांच शिविर लगाए गए।
ग्रामीणों का दावा है कि, अकेले मुड़वाही गांव में पिछले पखवाड़े के दौरान 6 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 2-3 मौतें मलेरिया से हुईं। उनका आरोप है कि कई मृतकों की मलेरिया जांच तक नहीं कराई गई और बिना जांच के ही अन्य बीमारियों को मौत का कारण बताया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर इलाज और जांच होती तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
1300 से अधिक ग्रामीणों की जांच, 50 संक्रमित
मामले के तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में 10 मेडिकल टीमों को तैनात किया। विशेष अभियान के तहत 1,300 से अधिक ग्रामीणों की जांच की गई, जिसमें छह बच्चों सहित 50 से अधिक लोगों में मलेरिया संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें 20 मरीजों का इलाज झलमला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है, जबकि अन्य मरीजों का उपचार रेंगाखार, बोड़ला स्वास्थ्य केंद्र और घर पर किया जा रहा है।
अभियान पर भी उठे सवाल
गौरतलब है कि, 15 जून से 14 जुलाई 2026 तक प्रदेशभर में 'मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान' चलाया गया था। अभियान के दौरान हजारों लोगों की जांच कर संक्रमण नियंत्रण का दावा किया गया था, लेकिन अभियान समाप्त होने के महज दो सप्ताह बाद ही संवेदनशील वनांचल में बड़ी संख्या में मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और फॉलो-अप व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
CMHO बोले- स्थिति नियंत्रण में
कबीरधाम के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. देवेंद्र कुमार तुरे ने कहा कि, प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सर्वे, दवा वितरण, कीटनाशक छिड़काव और मच्छरदानियों का वितरण किया जा रहा है। उनके अनुसार, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और जिले में मलेरिया से किसी भी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों के आरोप और स्वास्थ्य विभाग के दावों के बीच अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संदिग्ध मौतों की वास्तविक वजह सामने लाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
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