भिलाई/अंबिकापुर। झीरम घाटी हत्याकांड में NIA की विशेष अदालत द्वारा 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए जांच और कार्रवाई को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। बघेल का कहना है कि 13 वर्ष पुराने इस मामले में सजा तो हुई है, लेकिन हमले की पूरी साजिश सामने आए बिना पीड़ित परिवारों को पूर्ण न्याय कैसे मिलेगा?
अंबिकापुर पहुंचे भूपेश बघेल ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि, यदि जांच एजेंसी के अनुसार झीरम घाटी हमले में बड़ी संख्या में नक्सली शामिल थे, तो मामले में सिर्फ 10 लोगों को ही दोषी ठहराकर सजा क्यों हुई?
अगर 200 नक्सली थे तो बाकी कहां गए?
बघेल ने दावा किया कि, NIA की ओर से जांच के दौरान करीब 200 नक्सलियों की मौजूदगी की बात सामने आती रही है। ऐसे में उन्होंने पूछा कि हमले में कथित तौर पर शामिल अन्य लोगों और विशेष रूप से बड़े नक्सली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि, FIR में जिन बड़े नक्सली नेताओं के नाम होने की बात सामने आई थी, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? बघेल के मुताबिक, इस मामले में किसी बड़े नक्सली नेता को सजा नहीं मिली है।
सुरक्षा चूक पर भी उठे सवाल
झीरम घाटी हमले की जांच को लेकर बघेल ने सुरक्षा व्यवस्था के मुद्दे को भी उठाया। उनका कहना है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सुरक्षा में चूक की बात स्वीकार की थी। इसके बावजूद, बघेल के दावे के अनुसार, जांच में किसी सुरक्षा कर्मी से पूछताछ नहीं की गई और न ही किसी कांस्टेबल को इस मामले में सजा हुई। यही सवाल अब जांच की दिशा और उसके दायरे को लेकर बहस का केंद्र बन गया है।
पूरी साजिश सामने क्यों नहीं आई?
उन्होंने आरोप लगाया कि, झीरम घाटी हमले की पूरी साजिश अब तक सामने नहीं आई है और NIA की जांच भी सवालों के घेरे में है। बघेल ने सवाल किया कि अगर बड़े नक्सली नेताओं के नाम सामने आए थे, तो आखिर किन परिस्थितियों में उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई? यह भी दावा किया कि, बाद में आत्मसमर्पण कर जेल में बंद कुछ नक्सलियों के बयान तक नहीं लिए गए। बघेल के मुताबिक, जब तक हमले में शामिल सभी लोगों की भूमिका और पूरी साजिश सामने नहीं आती, तब तक पीड़ित परिवारों के न्याय से जुड़े सवाल बने रहेंगे।
25 मई 2013 को दहला था झीरम
गौरतलब है कि, 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर बड़ा नक्सली हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। घटना के करीब 13 वर्ष बाद 16 सितंबर 2026 को NIA की विशेष अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया।
अदालत के फैसले के बाद अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर यह सवाल चर्चा में है कि क्या दोषियों को सजा मिलने के साथ झीरम की पूरी साजिश का सच भी सामने आया है, या जांच से जुड़े कुछ सवाल अभी बाकी हैं?
भूपेश बघेल ने इन्हीं सवालों के आधार पर जांच की व्यापकता और पीड़ित परिवारों को मिले न्याय पर सवाल उठाए हैं।
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