रायपुर। नया रायपुर के चर्चित ब्लू वॉटर में डूबे युवक आदिल खान की तलाश में पिछले करीब 108 घंटे से जारी रेस्क्यू ऑपरेशन अब बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गया है। जिला प्रशासन की टीमें और स्थानीय गोताखोर लगातार अभियान में जुटे हैं, लेकिन अब तक आदिल का कोई सुराग नहीं मिल सका है। लगातार असफल हो रहे प्रयासों के बीच अब भारतीय नौसेना (Indian Navy) की विशेषज्ञ टीम को इस मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन में उतारा जा रहा है।
मुख्यमंत्री की पहल के बाद नेवी टीम रवाना
आदिल खान की तलाश को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विशेष पहल करते हुए भारतीय नौसेना से मदद मांगी है। इसके बाद विशाखापत्तनम से नौसेना की विशेष प्रशिक्षित गोताखोर टीम रविवार (23 अगस्त 2026) को नया रायपुर पहुंचेगी और इसके बाद मौके पर हालात का जायजा लेकर रेस्क्यू अभियान शुरू करेगी।
गहराई बनी सबसे बड़ी चुनौती
ब्लू वॉटर में रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पानी की गहराई और वहां की परिस्थितियां हैं। स्थानीय गोताखोरों के पास सीमित गहराई तक ही जाने के लिए प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध हैं। बताया जा रहा है कि वे करीब 60 फीट से अधिक गहराई तक सुरक्षित गोताखोरी करने में सक्षम नहीं हैं।
वहीं, ब्लू वॉटर की गहराई को लेकर करीब 400 फीट तक के अनुमान सामने आ रहे हैं। ऐसे में इतनी गहराई में सामान्य गोताखोरों के लिए तलाशी अभियान चलाना बेहद जोखिम भरा है।
3 दिनों से लगातार तलाश, फिर भी खाली हाथ
आदिल खान की तलाश में प्रशासन की टीमें पिछले कई दिनों से लगातार अभियान चला रही हैं। पानी के भीतर कई स्तरों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। अब नौसेना की टीम के पास मौजूद विशेषज्ञ गोताखोर, अंडरवॉटर सर्च तकनीक और आधुनिक उपकरण इस अभियान के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आए हैं।
परिवार की उम्मीदें अब नेवी पर टिकीं
लगातार कई घंटों से अपने बेटे की तलाश का इंतजार कर रहे आदिल खान के परिजनों के लिए यह समय बेहद मुश्किल है। प्रशासनिक प्रयासों के बाद अब भारतीय नौसेना की विशेषज्ञ टीम के आने से परिवार को उम्मीद बंधी है कि आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित गोताखोरों की मदद से आदिल का जल्द पता लगाया जा सकेगा।
अब सबकी नजरें नौसेना की टीम के नया रायपुर पहुंचने और उसके बाद शुरू होने वाले विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं। चुनौती बेहद कठिन है, लेकिन परिवार को भरोसा है कि देश की सबसे प्रशिक्षित समुद्री बचाव टीमों में शामिल नौसेना के विशेषज्ञ इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाने में सफल होंगे।
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