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अखिलेश यादव ने चला बड़ा सियासी दांव! संविधान दिवस पर आएगा ‘PDA का प्रणपत्र’, BJP की बढ़ेगी चुनौती?

 Newsbaji  |  Oct 19, 2026 02:43 PM  | 
Last Updated : Oct 19, 2026 02:43 PM
अखिलेश यादव 26 नवंबर को जारी करेंगे ‘PDA का प्रणपत्र’, 2027 चुनाव पर सपा का बड़ा दांव
अखिलेश यादव 26 नवंबर को जारी करेंगे ‘PDA का प्रणपत्र’, 2027 चुनाव पर सपा का बड़ा दांव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनावी तैयारियों के बीच बड़ा ऐलान करते हुए 26 नवंबर 2026 को संविधान दिवस के अवसर पर पार्टी का घोषणापत्र जारी करने की घोषणा की है। इसे ‘सत्ताइस का संकल्प : पीडीए का प्रणपत्र’ नाम दिया गया है।

अखिलेश यादव ने इसे ‘जन-मन का मैनिफेस्टो’ बताते हुए साफ संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में PDA की राजनीति सपा की रणनीति के केंद्र में रहने वाली है।

संविधान दिवस पर PDA के एजेंडे का ऐलान
अखिलेश यादव ने सोमवार सुबह अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर घोषणापत्र जारी करने की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “सत्ताइस का संकल्प : पीडीए का प्रणपत्र। संविधान दिवस 26 नवंबर 2026 के लोकतांत्रिक पावन अवसर पर हम जारी करेंगे ‘जन-मन का मैनिफेस्टो’।”

संविधान दिवस के दिन घोषणापत्र जारी करने की घोषणा को सपा की राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी इस अवसर के जरिए संविधान, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दे सकती है। हालांकि, घोषणापत्र में किन योजनाओं, वादों और नीतिगत प्रस्तावों को शामिल किया जाएगा, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है।

2024 के लोकसभा चुनाव से मिली ताकत, अब 2027 पर नजर
समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के भीतर शानदार प्रदर्शन करते हुए 80 में से 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में पार्टी ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA समीकरण पर विशेष जोर दिया था। चुनावी नतीजों ने सपा को प्रदेश की राजनीति में मजबूत स्थिति दिलाई और अखिलेश यादव के नेतृत्व को नई धार दी।

अब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में भी पार्टी इसी राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ‘PDA का प्रणपत्र’ इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सपा की कोशिश है कि सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को चुनावी विमर्श के केंद्र में लाया जाए।

दूसरे दलों के नेताओं को जोड़ने में जुटी सपा
PDA के विस्तार के लिए समाजवादी पार्टी दूसरे राजनीतिक दलों के पिछड़े और दलित नेताओं को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव अपनी जनसभाओं में लगातार दलितों, पिछड़ों और वंचित तबकों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं।

अखिलेश यादव का कहना है कि जो पीड़ित है, वह PDA का हिस्सा है और समाजवादी पार्टी में सभी की बात सुनी जाएगी। इस संदेश के जरिए पार्टी अपने सामाजिक आधार को व्यापक बनाने और अलग-अलग वर्गों को एक राजनीतिक मंच पर लाने की कोशिश कर रही है।

BJP पर हमलावर अखिलेश, सामाजिक न्याय बनेगा चुनावी मुद्दा?
अखिलेश यादव लगातार भाजपा सरकार पर दलितों और पिछड़ों के साथ अत्याचार होने का आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर इन वर्गों को सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए काम किया जाएगा। वहीं, भाजपा और सपा के बीच आगामी विधानसभा चुनाव में किन मुद्दों पर सीधा मुकाबला होगा, यह आने वाले महीनों में और स्पष्ट होगा।

26 नवंबर पर टिकी निगाहें, क्या होगा PDA का चुनावी रोडमैप?
‘सत्ताइस का संकल्प : पीडीए का प्रणपत्र’ की घोषणा के बाद अब राजनीतिक हलकों की नजर 26 नवंबर पर टिक गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अखिलेश यादव अपने घोषणापत्र में सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ रोजगार, शिक्षा, किसानों, युवाओं तथा महंगाई जैसे मुद्दों पर क्या रोडमैप पेश करते हैं।
 

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