रायपुर। बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेशभर में उपचार की व्यापक व्यवस्था सुनिश्चित की है। राज्य के सभी 33 जिलों के जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में 1,00,960 पॉलीवैलेंट एंटी स्नेक वेनम (ASV) वायल उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि सर्पदंश के मरीजों का तत्काल इलाज शुरू किया जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एंटी स्नेक वेनम का वितरण जिलों की जरूरत, पिछले वर्षों में सामने आए मामलों और संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान में रखकर किया गया है।
सहित सभी जिलों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
अंधविश्वास नहीं, तुरंत अस्पताल पहुंचें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक या घरेलू उपायों में समय गंवाना जानलेवा साबित हो सकता है। यदि दंश के स्थान पर सूजन, रक्तस्राव, दो दांतों जैसे निशान, आंखों की पलकों का झुकना, धुंधला दिखना या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दें तो मरीज को तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केन्द्र ले जाएं। जरूरत पड़ने पर 108 एम्बुलेंस सेवा का उपयोग करें।
क्या न करें
सर्पदंश की स्थिति में प्रभावित अंग पर चीरा न लगाएं, विष चूसने की कोशिश न करें, कसकर रस्सी या कपड़ा न बांधें और झाड़-फूंक के भरोसे समय बिल्कुल न गंवाएं। मरीज को शांत रखें, अनावश्यक रूप से चलने-फिरने से बचाएं और जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं।
बरसात में रखें ये सावधानियां
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि, सर्पदंश की किसी भी घटना में अंधविश्वास के बजाय वैज्ञानिक उपचार अपनाएं। समय पर अस्पताल पहुंचना ही मरीज की जान बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।
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