रायपुर/नई दिल्ली। महादेव सट्टा एप और स्काई एक्सचेंज से जुड़े कथित हजारों करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ के संयोजक और भाजपा के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग के पुत्र, विकास गर्ग को गिरफ्तार कर लिया है। रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने उन्हें 10 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है। अब एजेंसी उनसे हवाला नेटवर्क, शेल कंपनियों, विदेशी लेन-देन और महादेव एप से जुड़े कथित अवैध धन के निवेश को लेकर गहन पूछताछ करेगी।
ED का दावा है कि, विकास गर्ग इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की एक अहम कड़ी हैं। गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही एजेंसी ने विकास गर्ग, उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों की 940.77 करोड़ रुपए मूल्य की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की थीं। इनमें दिल्ली समेत कई स्थानों पर स्थित मकान, जमीन, करोड़ों रुपए के शेयर, प्रतिभूतियां और अन्य निवेश शामिल हैं।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने X पर लिखा: https://x.com/bhupeshbaghel/status/2077342643353514428?s=48
दिल्ली से गिरफ्तारी, रायपुर में कोर्ट ने भेजा रिमांड पर
ईडी ने मंगलवार को विकास गर्ग को दिल्ली स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया। इसके बाद उन्हें तिस हजारी कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लिया गया और रायपुर लाया गया। बुधवार को विशेष पीएमएलए अदालत में करीब छह घंटे चली सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया।
1,300 करोड़ की फंडिंग जांच के दायरे में
ईडी के अनुसार, विकास गर्ग की कंपनी एराया लाइफस्पेस लिमिटेड को स्काई एक्सचेंज के माध्यम से 1,300 करोड़ रुपए से अधिक की धन राशि मिली। एजेंसी का आरोप है कि इसी रकम का इस्तेमाल अमेरिका की दिवालिया घोषित कंपनी एबिक्स ग्रुप (Ebix Group) में करीब 1,273.25 करोड़ रुपए के अधिग्रहण के लिए किया गया। ईडी का कहना है कि वह इस रकम के 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से का मनी ट्रेल स्थापित कर चुकी है, जबकि बाकी लेन-देन की जांच जारी है।
स्काई एक्सचेंज और हवाला नेटवर्क की जांच तेज
जांच एजेंसी के मुताबिक, महादेव सट्टा एप के प्रमोटरों ने स्काई एक्सचेंज नामक ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये भारत भेजे। आरोप है कि दुबई स्थित हवाला नेटवर्क के माध्यम से यह धन विभिन्न कंपनियों तक पहुंचाया गया और बाद में वैध कारोबारी निवेश का रूप दिया गया।
क्या है महादेव सट्टा एप मामला?
ईडी के अनुसार, महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क की शुरुआत छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने कोविड-19 महामारी के दौरान की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह नेटवर्क बाद में देश-विदेश तक फैल गया और इसके जरिए हजारों करोड़ रुपए का अवैध कारोबार किया गया। सट्टे से अर्जित धन को हवाला के जरिए विदेश भेजकर विभिन्न कंपनियों के माध्यम से भारत में निवेश किया गया।
लेयरिंग के जरिए किया गया निवेश
ईडी का आरोप है कि कथित अवैध धन को सीधे निवेश करने के बजाय कई कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के जरिए घुमाया गया। मनी लॉन्ड्रिंग की इस प्रक्रिया को लेयरिंग कहा जाता है। इसके बाद इस धन का इस्तेमाल कंपनियों में निवेश, शेयर खरीदने, जमीन और अन्य परिसंपत्तियां खरीदने में किया गया।
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