रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों के आरोपी वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को स्पेशल कोर्ट ने 17 जुलाई 2026 तक आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की रिमांड पर भेज दिया है। गुरुवार को उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने यह आदेश दिया।
विभिन्न मामलों की होगी पूछताछ
बचाव पक्ष के अधिवक्ता फैजल रिजवी ने बताया कि, रिमांड अवधि के दौरान EOW रामगोपाल अग्रवाल से विभिन्न मामलों में पूछताछ करेगी। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उन्हें फिर से अदालत में पेश किया जाएगा।
रामगोपाल अग्रवाल को बुधवार को EOW ने हिरासत में लिया था। जांच एजेंसियों के अनुसार वे कथित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों में आरोपी हैं और पिछले करीब 3 वर्षों से फरार बताए जा रहे थे। उनकी तलाश EOW के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रहा था। अग्रवाल पूर्व में नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
बेटे से पूछताछ के बाद EOW पहुंचे
कस्टम मिलिंग मामले में EOW ने रामगोपाल अग्रवाल को समन जारी किया था। मंगलवार को उनके बेटे वैभव अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ की गई। इसके अगले दिन रामगोपाल अग्रवाल स्वयं EOW कार्यालय पहुंचे, जहां एजेंसी ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
क्या है कस्टम मिलिंग मामला?
EOW के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान की कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में नियमों का उल्लंघन किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे करीब 127 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। मामले की जांच जारी है और आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
क्या है कोल लेवी मामला?
ED और EOW के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन के हिसाब से कथित रूप से अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए लगभग 540 करोड़ रुपए की अवैध लेवी वसूली गई। मामले में कई IAS अफसरों, कारोबारियों, बिचौलियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी बाकी है।
क्या है शराब घोटाला?
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। ED और EOW का दावा है कि इस कथित घोटाले का आकार करीब 3,200 करोड़ रुपए है। मामले में कई अफसरों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है।
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