रायपुर। भाजपा की केंद्रीय टीम के ऐलान के बाद अब छत्तीसगढ़ भाजपा में भी संगठनात्मक बदलाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि प्रदेश संगठन के रोजमर्रा के कामकाज को गति देने और आगामी सांगठनिक गतिविधियों को धार देने के लिए जल्द ही कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो सकता है। इसके साथ ही लंबे समय से खाली चल रहे प्रदेश प्रभारी पद पर भी नए चेहरे की नियुक्ति की अटकलें तेज हो गई हैं।
क्षेत्रीय संतुलन पर रहेगा नेतृत्व का फोकस
कार्यकारी अध्यक्ष के चयन में भाजपा नेतृत्व के सामने संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक सक्रियता के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं सामाजिक संतुलन साधने की चुनौती भी होगी। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव बस्तर संभाग से आते हैं। ऐसे में यदि मैदानी क्षेत्र से किसी अनुभवी नेता को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलती है, तो इसे संगठन में क्षेत्रीय संतुलन कायम करने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है।
पार्टी के सामने आने वाले समय में संगठन को और अधिक सक्रिय करने, सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने की चुनौती है। ऐसे में कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका महज संगठनात्मक औपचारिकता तक सीमित नहीं रहने वाली है।
प्रदेश प्रभारी पद पर भी जल्द फैसला संभव
छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में प्रदेश प्रभारी का पद भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बिहार के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन लंबे समय तक छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी रहे। राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब प्रदेश संगठन को नए प्रभारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
केंद्रीय टीम के पुनर्गठन के बाद माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व छत्तीसगढ़ के लिए भी जल्द नए प्रभारी के नाम पर फैसला कर सकता है। नए प्रभारी के सामने प्रदेश संगठन, भाजपा सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ संगठनात्मक गतिविधियों को नई दिशा देने की जिम्मेदारी होगी।
इन नामों की चर्चा
भाजपा के संगठनात्मक गलियारों में संभावित कार्यकारी अध्यक्ष के लिए जिन नामों की चर्चा है, उनमें राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। संतोष पांडेय लगातार दूसरी बार लोकसभा सांसद हैं और प्रदेश भाजपा में महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
संगठन में उनके लंबे अनुभव, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क और केंद्रीय नेतृत्व के साथ बेहतर समन्वय को उनकी प्रमुख ताकत माना जाता है। वहीं, पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ रणनीतिकार शिवरतन शर्मा का नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है। संगठन और मैदानी राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ है। लंबे समय से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहने और संगठनात्मक मामलों की गहरी समझ के कारण उन्हें भी मजबूत संगठनकर्ता माना जाता है।
सरकार-संगठन के बीच तालमेल पर जोर
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को पार्टी नेतृत्व लगातार महत्व देता रहा है। ऐसे में कार्यकारी अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति को केवल पदों पर बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक और संगठनात्मक रोडमैप से जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के लिए आगामी समय में संगठन के विस्तार, सदस्यता एवं प्रशिक्षण गतिविधियों, बूथ स्तर की मजबूती और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने के साथ-साथ सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना अहम होगा। ऐसे में नए संगठनात्मक चेहरों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
फैसला दिल्ली से, नजरें छत्तीसगढ़ पर
फिलहाल भाजपा के भीतर संभावित नामों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। संतोष पांडेय और शिवरतन शर्मा जैसे नामों की चर्चा ने प्रदेश की राजनीति में उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
अब निगाहें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह छत्तीसगढ़ संगठन की कमान में किस चेहरे को नई जिम्मेदारी देता है और क्षेत्रीय-सामाजिक समीकरणों के साथ संगठनात्मक अनुभव के बीच किस तरह संतुलन साधता है।
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