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विधानसभा में पेयजल पर घमासान, रायपुर के 1.21 लाख घरों में पानी नहीं पहुंचने का दावा, अमृत मिशन पर सरकार विपक्ष आमने-सामने

 Newsbaji  |  Jul 14, 2026 04:22 PM  | 
Last Updated : Jul 14, 2026 04:22 PM
Image Title (Hindi) छत्तीसगढ़ विधानसभा में रायपुर की पेयजल व्यवस्था, अमृत मिशन और जल जीवन मिशन पर चर्चा
Image Title (Hindi) छत्तीसगढ़ विधानसभा में रायपुर की पेयजल व्यवस्था, अमृत मिशन और जल जीवन मिशन पर चर्चा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान रायपुर की पेयजल व्यवस्था, अमृत मिशन और जल जीवन मिशन को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, सुनील सोनी, राजेश मूणत और भईयालाल राजवाड़े ने सरकार से जलापूर्ति की स्थिति पर जवाब मांगा और राजधानी में हर साल होने वाले जल संकट का मुद्दा उठाया।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि, रायपुर के कई इलाकों में पानी की टंकियां और पाइपलाइन होने के बावजूद लोगों को नियमित पानी नहीं मिल रहा है। कई वार्डों में अब भी टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की जा रही है, जिससे अमृत मिशन के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अमृत मिशन पर सरकार का जवाब
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के सवाल का जवाब देते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री तथा उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि रायपुर में वर्ष 2016 से अमृत मिशन लागू किया गया था। उपलब्ध बजट के आधार पर पांच पैकेज स्वीकृत किए गए, जिनमें कई कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ कार्य अभी प्रक्रियाधीन हैं।

उन्होंने कहा कि, वर्तमान में 304 करोड़ रुपए के जलापूर्ति संबंधी विकास कार्य चल रहे हैं। सरकार का लक्ष्य हर घर तक नल कनेक्शन और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है।

1.21 लाख घरों तक नहीं पहुंच रहा पानी
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट अजय चंद्राकर ने दावा किया कि रायपुर में 1 लाख 21 हजार घरों तक आज भी नियमित पानी नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने पूछा कि अमृत मिशन की मूल योजना कितने वार्डों के लिए बनाई गई थी और इसके लिए कितनी राशि का प्रस्ताव भेजा गया था।

इस पर अरुण साव ने कहा कि, अमृत मिशन के पहले चरण में केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार राशि स्वीकृत हुई थी। सीमित बजट के कारण कुछ कार्य अधूरे रह गए, जिन्हें अब तेजी से पूरा किया जा रहा है।

15वें वित्त आयोग की राशि से भी होंगे काम
सदन में स्मार्ट सिटी परियोजना और 15वें वित्त आयोग के तहत जलापूर्ति के लिए खर्च की गई राशि का भी मुद्दा उठा। मंत्री ने बताया कि 45.33 करोड़ रुपए की लागत से लाभांडी सहित विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल अधोसंरचना विकसित की जा रही है।

PHE विभाग की भूमिका पर भी सवाल
अजय चंद्राकर ने लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHE) विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि नगर निगम क्षेत्रों में जलापूर्ति की जिम्मेदारी किसकी है और इसके लिए कौन अधिकारी जवाबदेह हैं।

जवाब में मंत्री ने कहा कि पेयजल आपूर्ति और उसकी गुणवत्ता की निगरानी के लिए विभाग में पूरी व्यवस्था है तथा कार्यपालन अभियंता सहित संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। हालांकि विपक्ष ने इस जवाब को अधूरा बताया।

बैकुंठपुर में जल जीवन मिशन पर भी चर्चा
भाजपा विधायक भईयालाल राजवाड़े ने बैकुंठपुर में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजना का लाभ अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस पर मंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार मिशन की नियमित समीक्षा कर रही है और जहां कमियां मिल रही हैं, वहां सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है।

सदन में जल संकट बना बड़ा मुद्दा
प्रश्नकाल के दौरान हुई इस चर्चा से स्पष्ट हुआ कि राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में पेयजल व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर विपक्ष सरकार को लगातार घेर रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि बजट और संसाधनों की सीमाओं के बावजूद अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है।

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