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प्रशासनिक उपेक्षा, जातीय उत्पीड़न, पीड़ित परिवार के 17 सदस्यों ने सामूहिक इच्छा मृत्यु की मांगी अनुमति

 Newsbaji  |  Jun 29, 2025 10:58 AM  | 
Last Updated : Jun 29, 2025 10:58 AM
एक ही परिवार के 17 लोगों ने इच्छा मृत्यु के लिए सरकार से गुहार लगाई
एक ही परिवार के 17 लोगों ने इच्छा मृत्यु के लिए सरकार से गुहार लगाई

बेमेतरा/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से दिल व दिमाग को हिला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक ही परिवार के 17 सदस्यों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कानून मंत्री, मुख्य न्यायधीश, राज्यपाल, सीएम, मानव अधिकार सहित 23 विभागों और राजनीतिक पार्टियों को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। परिवार ने इसे लेकर राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को पत्र सौंपा है। वहीं, इस पत्र के बाद से बेमेतरा जिला प्रशासन के होश उड़ गए है और जवाब नहीं दे पा रहा है।   

जिले के मोहतरा (ख) गांव से एक बेहद संवेदनशील और मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। जहां अनुसूचित जाति वर्ग के सतनामी समाज से आने वाले भूमिहीन परिवार ने 14 वर्षों से निरंतर जातीय उत्पीड़न और प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आकर परिवार व समाज के लोगों के साथ जिला कार्यालय कलेक्टोरेट पहुंचे थे। जहां अपर कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम पत्र सौंपा है और सभी 17 सदस्यों के साथ इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है। 

पीड़ित परिवार के सदस्यों ने बताया है कि, वर्ष 2009 में तत्कालीन सरपंच और उपसरपंच ने 50 हजार रुपए की घूस लेकर उन्हें गांव से दूर शासकीय जमीन पर बसाया था। वे और उनका परिवार वर्षों तक मेहनत-मजदूरी करके वहीं अपना जीवन यापन कर रहे थे। लेकिन वर्ष 2011 में जातिवादी मानसिकता वाले ग्रामीणों ने उनका घर जला दिया था, सारा सामान लूट लिया। इतना ही नहीं, वर्ष 2019 में तो हद ही हो गई, उन्हें अर्धनग्न हालत में पूरे गांव में घुमाया गया और खंडसरा चौकी पुलिस की मौजूदगी में जबरन सभी ग्रामीणों के पैर छूकर माफी भी मंगवाई गई थी। 

पीड़ित परिवार ने बताया कि, मासूम बच्चे भी इस सदमे के शिकार हुए और सखी सेंटर भेजना पड़ा था। जहां करीब 15 दिनों तक वहां रहे, इसके बाद परिवार ने किसी तरह कच्चा मकान बनाकर, दोबारा वहीं रहने लगे। लेकिन तकलीफें खत्म नहीं हुईं। वर्ष 2024 में फिर घर को तोड़ा गया और अब तो ज्यादा ही हद हो गई, कुछ दिन पहले बिजली कटवा दी गई है। भरी गर्मी में पीने के पानी के लिए तीन किलोमीटर दूसरी गांव से पानी लाकर अपने परिवार की प्यास बुझा रहे है। अभी पानी की प्यास बुझ नहीं पायी थी कि 18 जून 2025 को प्रशासन ने पुलिस बल, ग्रामीणों की मौजूदगी में बगैर नोटिस दिए बिना व्यवस्थापन किए भरी बरसात में उनकी झोपड़ियों को जेसीबी से तोड़ दिया गया है।

वर्तमान में श्यामदास सतनामी का पूरा परिवार बिना बिजली, पानी के खुले आसमान के नीचे जीने को मजबूर है। श्यामदास ने अपने पत्र में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कानून मंत्री, मुख्य न्यायधीश, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मानव अधिकार सहित 23 सम्माननीय विभाग और राजनीतिक पार्टियों को आवेदन पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। 

सरकार हमें इच्छा मृत्यु की अनुमति दें दीजिए
पीड़ित परिवार गुहार लगा रहा है कि हम अपने वजूद को हर दिन मरता हुआ देख रहे हैं। जब जमीन, घर, समाज और शासन किसी भी स्तर पर न्याय नहीं मिल रहा है, तो कृपया हमें और हमारे परिवार को इच्छा मृत्यु की अनुमति ही दे दीजिए। मामले में बेमेतरा जिला प्रशासन व शासन पूरी तरह से मौन है, तो वहीं जिला प्रगतिशील सतनामी समाज ने पीड़ित को न्याय नहीं मिलने पर उग्र आंदोलन की बात कही है।

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